ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा के मामले में जांच जारी है। इस बीच जांच एजेंसियों को एक बड़ा और चौंकाने वाला सुराग मिला है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान आरोपियों ने CCTV कैमरों से बचने के लिए खास रणनीति अपनाई थी, जिसमें महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया था।
जांच में सामने आया है कि कुछ महिलाओं को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे प्रदर्शन के दौरान CCTV कैमरों को ढक दें या उन्हें नुकसान पहुंचाएं। पुलिस को कई ऐसे वीडियो और फुटेज मिले हैं, जिनमें महिलाएं कैमरों पर दुपट्टा या कपड़ा डालती नजर आ रही हैं। कुछ मामलों में कैमरे तोड़ने की भी कोशिश की गई।इससे साफ संकेत मिलता है कि पूरी घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था।
प्रदेश को बदनाम करने की साजिश?
पुलिस का दावा है कि यह हिंसा सिर्फ स्थानीय विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने की साजिश हो सकती है। प्रदर्शन को इस तरह से आयोजित किया गया कि वह मीडिया और सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा चर्चा में आए।
SIT कर रही है पूरे मामले की जांच
इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम में एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी समेत कई अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल हैं। हिंसा से जुड़े सभी मुकदमे अब SIT के पास हैं, जो पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
अब तक जिन आरोपियों की पहचान हो चुकी है, उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। स्वॉट (SWAT) और सीआरटी (CRT) समेत कुल छह टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
युवतियों से पूछताछ जारी
इस मामले में कुछ युवतियों को पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है। रूपेश राय के कोर ग्रुप से जुड़ी मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता से लगातार सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि प्रदर्शन में उनकी भूमिका क्या थी और किसके निर्देश पर काम किया गया।
इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी को लेकर 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है। पुलिस ने उनकी 7 दिन की रिमांड मांगी है, ताकि उनसे और गहन पूछताछ की जा सके।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी हुआ इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया है कि ‘मजदूर बिगुल’ नामक संगठन ने अपने ऑनलाइन पोर्टल और वेबसाइट का इस्तेमाल कर श्रमिकों को उकसाने का काम किया। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रदर्शन को डिजिटल माध्यम से भी बढ़ावा दिया गया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच शुरू कर दी है। कुछ अहम डेटा हासिल करने के लिए गूगल प्रबंधन से भी संपर्क किया गया है। हालांकि, अभी तक गूगल की तरफ से जवाब नहीं आया है, लेकिन पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही जरूरी जानकारी मिल जाएगी।
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