ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा और ग्रेटर नोएडा पिछले कुछ सालों से तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन 2026 को गौतमबुद्ध नगर के लिए खास माना जा रहा है। वजह साफ है—इस साल कई ऐसे प्रोजेक्ट सामने हैं जिनका असर सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा, जैसे ट्रैफिक कम होना, सफर के नए रास्ते खुलना, मेट्रो कनेक्टिविटी आसान होना और शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना। अगर ये काम तय समय के आसपास पूरे हो जाते हैं, तो नोएडा-ग्रेनो का “नक्शा” और अनुभव दोनों बदल सकता है।
सबसे बड़ी चर्चा जेवर में बनने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर
है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा वेस्ट का ट्रैफिक, मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवॉक,
हिंडन नदी पर नया
पुल और सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत हजारों कैमरे—ये सब मिलकर शहर को नई दिशा दे
सकते हैं।
जेवर एयरपोर्ट: उद्घाटन का इंतजार
जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम पूरा होने की बात कही गई है
और अब उद्घाटन का इंतजार बताया गया है। यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे
बना है और दावा है कि इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की हवाई
कनेक्टिविटी को नई दिशा मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, टैक्सी-वे और बाकी तकनीकी
ढांचा तैयार है, ट्रायल भी हो चुका है और अब एयरोड्रम लाइसेंस का इंतजार है।
आम लोगों के लिहाज से देखें तो एयरपोर्ट का मतलब सिर्फ फ्लाइट नहीं
होता—इसका असर नौकरी, होटल, ट्रांसपोर्ट, टैक्सी, कार्गो और बिजनेस तक जाता है। यानी एयरपोर्ट शुरू
होते ही पूरे इलाके में नई हलचल और नए अवसर बढ़ सकते हैं।
नोएडा-ग्रेनो के बीच नया रास्ता
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच आवागमन आसान करने के लिए एक नया संपर्क
मार्ग मिलने की बात सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक नॉलेज पार्क-3 के पास हिंडन नदी पर
बन रहा पुल और उससे जुड़ी सड़क मार्च तक तैयार हो सकती है। इसके साथ ही शारदा
गोलचक्कर से हिंडन पुल तक सड़क भी बनाई जा रही है, जिससे नोएडा जाने के लिए एक और विकल्प
मिलेगा।
जिसने भी नोएडा-ग्रेनो के बीच रोज आना-जाना किया है, वह जानता है कि एक
नया विकल्प मिलने का मतलब है—कम समय, कम जाम और कम तनाव। खासकर ऑफिस टाइम में अगर एक
रूट फंस जाए, तो दूसरा रास्ता लोगों के लिए राहत बन जाता है।
सेक्टर-51 और 52 स्टेशन स्काईवॉक
2026 के पहले महीने में सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवॉक
मिलने की बात कही गई है। बताया गया कि 2018 में एक्वा लाइन मेट्रो शुरू होने के बाद
से यात्री एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाने में परेशानी महसूस कर रहे थे। इस
स्काईवॉक पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।
यह स्काईवॉक खासकर उन यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा बन सकता है जो
रोज़ मेट्रो बदलकर ऑफिस, कॉलेज या अन्य काम के लिए जाते हैं। अक्सर स्टेशन
कनेक्शन में “लास्ट 500 मीटर” सबसे ज्यादा भारी पड़ता है, और स्काईवॉक इसी परेशानी को घटा सकता है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट: गौड़ चौक अंडरपास
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में जाम की समस्या काफी पुरानी और बड़ी है। इसी को
कम करने के लिए गौड़ चौक पर बन रहा अंडरपास मई में शुरू होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह अंडरपास 700 मीटर लंबा और छह लेन का है, जिस पर 92 करोड़ रुपये खर्च हो
रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रेटर नोएडा, गौड़ सिटी और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को सीधे
लिंक कराना है।
अगर यह अंडरपास सही तरीके से ट्रैफिक को स्मूद कर देता है, तो रोजाना ऑफिस जाने
वाले, स्कूल
बसें, और
इमरजेंसी वाहनों को सीधा फायदा मिल सकता है। जाम कम होने का असर सिर्फ समय पर नहीं,
बल्कि फ्यूल,
प्रदूषण और लोगों के
मूड पर भी पड़ता है।
सेफ सिटी: 2700+ CCTV कैमरे
ग्रेटर नोएडा में “सेफ सिटी” और आधुनिक यातायात प्रबंधन परियोजना के
तहत 2700 से
ज्यादा CCTV कैमरे लगाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च से कैमरे
लगने शुरू हो सकते हैं, ट्रायल के बाद कंपनी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई गई है। जानकारी
यह भी है कि गोलचक्करों, बाजारों, सरकारी दफ्तरों और सेक्टरों में 350 से अधिक स्थानों पर
कैमरे लगाए जाएंगे, और दावा है कि इसी साल प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
कैमरों का असर दो तरीके से होता है—एक, सुरक्षा बढ़ती है; दूसरा, ट्रैफिक नियमों का पालन बढ़ता है। अगर
कैमरे सही तरीके से काम करते हैं और मॉनिटरिंग मजबूत रहती है, तो चोरी-छिनैती जैसी
घटनाओं पर भी रोक और सड़क पर अनुशासन—दोनों में सुधार संभव है।
2026 नोएडा के लिए क्यों “टर्निंग ईयर” बन सकता है?
इस साल की खास बात यह है कि कई प्रोजेक्ट एक साथ “ऑन ग्राउंड” असर
दिखाने वाले हैं—एयरपोर्ट, रोड-पुल, अंडरपास, मेट्रो कनेक्शन और CCTV नेटवर्क। इनका सीधा फायदा आम आदमी को समय
बचने, सफर
आसान होने और सुरक्षा बढ़ने के रूप में मिल सकता है। अब सबसे जरूरी बात यही है कि
काम तय समय पर और अच्छी क्वालिटी में पूरे हों, ताकि वाकई लोगों की जिंदगी में फर्क दिखे।
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