लोकसभा में अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला, बोले – ‘विदेश में रहेंगे तो सदन में कैसे बोलेंगे?’
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी की संसद में मौजूदगी, विदेश यात्राओं और बोलने के मुद्दे पर कई सवाल उठाए।
लोकसभा में अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला, बोले – ‘विदेश में रहेंगे तो सदन में कैसे बोलेंगे?’
  • Category: राजनीति

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। अपने जवाब में उन्होंने खास तौर पर विपक्ष के नेता राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया। अमित शाह ने सदन में राहुल गांधी की मौजूदगी, उनके विदेश दौरों और संसद में बोलने को लेकर कई सवाल उठाए। इस दौरान सदन में विपक्ष की ओर से हंगामा भी हुआ, जिस पर शाह ने तेज आवाज में कहा, “सुनो, अब सुनना पड़ेगा।”

 

‘आपको किसने रोका बोलने से?’

अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता और उनकी आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह तय करना कि किसी पार्टी की ओर से कौन बोलेगा, यह स्पीकर नहीं बल्कि उस पार्टी का फैसला होता है। शाह ने सवाल करते हुए कहा कि जब बोलने का मौका मिलता है तो राहुल गांधी अक्सर विदेश में नजर आते हैं, और बाद में शिकायत करते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

 

संसद में भाषण का आंकड़ा भी रखा

गृह मंत्री ने सदन में कांग्रेस सांसदों के बोलने का आंकड़ा भी पेश किया। उन्होंने कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों ने कुल 157 घंटे 55 मिनट तक अपनी बात रखी। उन्होंने पूछा कि इस दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कितना बोला। शाह ने कहा कि किसी स्पीकर ने उन्हें बोलने से नहीं रोका, लेकिन फिर भी यह आरोप लगाया जाता है कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।

 

‘जब सत्र होता है, तब विदेश में होते हैं’

अमित शाह ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा हुआ है जब संसद का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा था और राहुल गांधी विदेश यात्रा पर थे। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र 2025 के दौरान राहुल गांधी जर्मनी में थे। बजट सत्र 2025 के समय वे वियतनाम में थे। बजट सत्र 2023 में वे इंग्लैंड गए हुए थे। इसी तरह 2018 के बजट सत्र में वे सिंगापुर और मलेशिया की यात्रा पर थे।

 

शाह ने कहा कि जब कोई व्यक्ति जर्मनी, इंग्लैंड या सिंगापुर में होता है तो वह लोकसभा में कैसे बोल सकता है, क्योंकि यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं है।

 

‘सुनो, अब सुनना पड़ेगा’

अमित शाह जब राहुल गांधी की अनुपस्थिति और विदेश यात्राओं का जिक्र कर रहे थे, तब विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया। हंगामे के बीच शाह ने गुस्से में कहा, “सुनो, अब सुनना पड़ेगा।” इसके बाद उन्होंने अपने भाषण को जारी रखते हुए कई उदाहरणों के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।

 

स्पीकर के अधिकारों का किया बचाव

अमित शाह ने कहा कि अगर कोई सांसद बार-बार विषय से हटकर बोलता है तो स्पीकर के पास उसे रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी सदस्य को एक बार टोकने के बाद भी वह वही बात दोहराता है, तो स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ता है। शाह ने यह भी कहा कि संसद में अप्रकाशित किताब या पत्रिका का उद्धरण देना नियमों के खिलाफ है। अगर कोई सदस्य ऐसा करता है तो स्पीकर उसे रोक सकते हैं।

 

‘विपक्ष की आवाज हमने कभी नहीं दबाई’

गृह मंत्री ने साफ कहा कि सरकार ने कभी विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि असली मायनों में विपक्ष की आवाज दबाने का उदाहरण 1975 का आपातकाल था, जब पूरे विपक्ष को जेल में डाल दिया गया था। शाह ने कहा कि आज विपक्ष यह प्रचार करने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, लेकिन ऐसा नहीं है।

 

‘सदन नियमों से चलता है’

अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद नियमों और अनुशासन से चलती है। अगर कोई सदस्य नियमों का पालन नहीं करता तो उसका माइक बंद किया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार मंत्री का भी माइक बंद किया जाता है। हाल ही में जब Giriraj Singh सदन में बोल रहे थे तो उनका माइक भी बंद किया गया था। शाह ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि सदन के नियमों का हिस्सा है।

 

बीजेपी की छवि खराब करने का आरोप

अंत में अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे देशभर में यह प्रचार कर रहे हैं कि भाजपा सरकार विपक्ष को बोलने नहीं देती। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा की छवि खराब नहीं होती क्योंकि संसद में कौन बोलेगा, कब बोलेगा और कितना बोलेगा, इसका फैसला सत्ताधारी पार्टी नहीं बल्कि स्पीकर करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां सभी को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अधिकार है।

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