ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कर दिया। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है जहां UCC बिल को मंजूरी मिल चुकी है। इस बिल का उद्देश्य शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करना है। पूरा दिन चली चर्चा और हंगामे के बाद आखिरकार विधानसभा में ध्वनि मत से इस बिल को पास कर दिया गया। बिल पास होने के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
विपक्ष ने उठाई सेलेक्ट कमेटी की मांग
'यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम 2026 बिल' पर विधानसभा में पूरे दिन चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने मांग की कि इस बिल को और ज्यादा विचार-विमर्श के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और लगातार नारेबाजी करने लगे। वहीं सत्ता पक्ष के विधायक ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते रहे। भारी हंगामे के बीच स्पीकर ने ध्वनि मत से बिल को पास करा दिया।
सोमवार को पेश किया गया था बिल
असम सरकार ने यह बिल सोमवार को विधानसभा में पेश किया था। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद व्यक्तिगत मामलों में समानता लाना और कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाना है। इस बिल में बहुविवाह पर रोक लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे और समाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि इस कानून में अनुसूचित जनजाति समुदाय को छूट दी गई है। यानी यह कानून राज्य के आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं होगा।
UCC लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
अगर यह कानून लागू होता है तो असम में बहुविवाह या दूसरी शादी करने पर सात साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अगर कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए उसका पंजीकरण नहीं कराता है, तो उसे तीन महीने तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे समाज में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी और महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
विपक्ष ने जताई चिंता
विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह समाज के एक खास वर्ग के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कई विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के इतना बड़ा कानून लागू कर रही है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों की राय लेना जरूरी था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
देशभर में बढ़ी UCC पर बहस
असम में UCC बिल पास होने के बाद देशभर में एक बार फिर समान नागरिक संहिता को लेकर बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा, जबकि विरोधी इसे धार्मिक और सामाजिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि असम सरकार इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाती है।
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