ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ चुकी हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की अटकलों ने राज्य की राजनीति को और गर्म कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार, 28 मई को इस्तीफा दे सकते हैं। इस चर्चा को उस समय और बल मिला जब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में आयोजित ब्रेकफास्ट मीटिंग में शामिल होने की जानकारी सामने आई।
ब्रेकफास्ट मीटिंग पर टिकी सबकी नजर
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। जानकारी के मुताबिक डीके शिवकुमार गुरुवार सुबह दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचेंगे और सुबह 9 बजे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आवास पर होने वाली बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद दोनों नेता बेंगलुरु स्थित कांग्रेस कार्यालय में भी साथ दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में यह बैठक कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
सूत्रों के अनुसार हाल ही में दिल्ली में हुई कांग्रेस की बड़ी बैठक में राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा कि अगर वह मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो पार्टी में उनकी अहमियत कम नहीं होगी। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सिद्धारमैया राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाएं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया अभी भी राज्य में ओबीसी समुदाय का सबसे बड़ा चेहरा हैं, लेकिन अगले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया है।
दिल्ली में हुई मैराथन बैठक
मंगलवार को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस नेतृत्व की लंबी बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हुए। बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति, नेतृत्व परिवर्तन और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई।
ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा
कर्नाटक में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह चर्चा रही है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल का समझौता हुआ था। शिवकुमार समर्थक अब इसी समझौते का हवाला देकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि सिद्धारमैया कई बार कह चुके हैं कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। वहीं डीके शिवकुमार लगातार यह कहते रहे हैं कि वह पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे।
आगे क्या हो सकता है?
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगर सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हैं, तो कांग्रेस नेतृत्व डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश को राज्यसभा भेजकर संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सभी की नजर गुरुवार की बैठक और कांग्रेस नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
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