ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
सोशल मीडिया पर कभी-कभी एक छोटा सा वीडियो भी बड़ा मुद्दा बन जाता है। इस बार चर्चा में हैं सारा तेंदुलकर—जो एक जानी-मानी एंटरप्रेन्योर हैं और सचिन तेंदुलकर की बेटी भी हैं। गोवा की सड़कों पर दोस्तों के साथ टहलते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ, और बस इसी वीडियो ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया, लेकिन उसी तेजी से बहुत सारे लोग उनके समर्थन में भी सामने आए।
यह मामला सिर्फ सारा से जुड़ा नहीं है, बल्कि उस सोच से भी जुड़ा है जिसमें किसी
लड़की का दोस्तों के साथ घूमना, हंसना या अपनी जिंदगी जीना भी लोगों को “जज” करने
का मौका लगने लगता है। और जब सामने कोई चर्चित नाम हो, तो बातें और भी जल्दी फैलती हैं।
गोवा का वीडियो क्या है?
वायरल वीडियो में सारा तेंदुलकर अपने दोस्तों के साथ गोवा की सड़क पर
टहलती नजर आती हैं। यह वीडियो कब का है, यह साफ नहीं बताया गया, हालांकि कुछ यूजर्स का दावा है कि यह नए
साल के आसपास का हो सकता है। वीडियो में सारा के हाथ में एक बोतल दिखाई देती है।
इसी बोतल को लेकर कुछ लोगों ने अंदाजा लगा लिया कि यह बीयर की बोतल है और फिर
ट्रोलिंग शुरू हो गई।
यहीं से कहानी का दूसरा हिस्सा शुरू होता है—कुछ यूजर्स ने सारा को
निशाना बनाया और उनके पिता सचिन तेंदुलकर का नाम भी इसमें घसीटने लगे। यानी किसी
एक व्यक्ति के वीडियो पर बहस करते-करते बात परिवार तक पहुंच गई। सोशल मीडिया पर
ऐसा अक्सर होता है, जहां लोग बिना पूरी जानकारी जाने भी अपनी राय को “फैसला” बना देते
हैं।
ट्रोलिंग क्यों हुई?
ट्रोलिंग की वजह मुख्य तौर पर वही बोतल बनी, जिसे देखकर लोगों ने अपने-अपने मतलब निकाल
लिए। इंटरनेट पर कई बार लोग तस्वीर या वीडियो के एक फ्रेम से पूरी कहानी बना देते
हैं। कुछ लोगों ने यह मान लिया कि सारा शराब पी रही हैं और फिर उसी आधार पर
कमेंट्स करने लगे।
लेकिन यहां दो बातें समझने वाली हैं। पहली—वीडियो में बोतल दिखने का
मतलब यह नहीं कि कोई क्या पी रहा है या क्या नहीं। दूसरी—मान भी लें कि कोई वयस्क
अपने दोस्तों के साथ कुछ पी रहा है, तो भी वह निजी पसंद का मामला है, जब तक वह किसी को नुकसान
नहीं पहुंचा रहा। फिर भी सोशल मीडिया पर कई बार महिलाओं को इसी तरह “टारगेट” किया
जाता है।
सोशल मीडिया पर समर्थन भी क्यों बढ़ा?
जहां कुछ लोग सारा की आलोचना कर रहे थे, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स उनके सपोर्ट
में भी उतरे। कई लोगों ने साफ कहा कि इसमें ट्रोल करने जैसी बात है ही नहीं। एक
यूजर ने लिखा कि अगर सारा कुछ पी भी रही हैं तो इसका सचिन तेंदुलकर से क्या
लेना-देना। दूसरे यूजर ने कहा कि क्या एक बेटी अपने दोस्तों के साथ समय भी नहीं
बिता सकती?
इन प्रतिक्रियाओं से यह साफ हुआ कि सोशल मीडिया पर हर कोई एक जैसी सोच
नहीं रखता। बहुत से लोग अब इस बात पर आवाज उठाते हैं कि बिना वजह किसी को शर्मिंदा
करना या चरित्र पर सवाल उठाना गलत है। खासकर जब बात महिलाओं की आती है, तो कई बार ट्रोलिंग
की भाषा और इशारे ज्यादा खराब हो जाते हैं—इसी के खिलाफ लोग अब खुलकर बोलते भी
हैं।
सारा तेंदुलकर का क्रिकेट से रिश्ता क्या है?
सारा तेंदुलकर को लोग ज्यादातर सचिन तेंदुलकर की बेटी के तौर पर जानते
हैं, लेकिन
उनके बारे में कई बातें खुद उनकी अपनी पहचान से जुड़ी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक
सारा पहले ही बता चुकी हैं कि उन्होंने क्रिकेट को करियर के तौर पर क्यों नहीं
चुना। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि क्रिकेट हमेशा से उनके भाई अर्जुन
तेंदुलकर का क्षेत्र रहा है।
सारा ने यह भी माना कि उन्होंने गली क्रिकेट खेला है, लेकिन उन्होंने कभी
प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने का सपना नहीं देखा। वहीं अर्जुन तेंदुलकर घरेलू क्रिकेट
में गोवा के लिए ऑलराउंडर के तौर पर खेल रहे हैं। यानी क्रिकेट से उनका परिवार
जुड़ा जरूर है, लेकिन सारा ने अपने लिए अलग रास्ता चुना।
फिटनेस और वेलनेस में सारा की पहचान
सारा तेंदुलकर ने फिटनेस और वेलनेस के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई
है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2025 में उन्होंने मुंबई के अंधेरी इलाके में ‘Pilates
Academy X Sara Tendulkar’ की शुरुआत की थी। यह दुबई की एक मशहूर पिलाटेस अकादमी की भारत में
चौथी ब्रांच बताई गई है।
इसका मतलब साफ है—सारा सिर्फ “फेमस पेरेंट्स की बेटी” नहीं हैं,
बल्कि वे अपने करियर
और काम को लेकर भी एक्टिव हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर किसी वायरल वीडियो के आधार
पर उन्हें “जज” करना कई लोगों को गलत लगा, इसलिए सपोर्ट भी तेज़ी से आया।
ट्रोलिंग का असली नुकसान क्या होता है?
ऑनलाइन ट्रोलिंग कई बार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है।
सेलेब्रिटी होने पर भी इंसान के लिए लगातार नेगेटिव कमेंट्स पढ़ना आसान नहीं होता।
इसके अलावा ट्रोलिंग का एक नुकसान यह भी है कि चर्चा असली मुद्दों से हटकर अफवाह
और अंदाजों पर टिक जाती है।
इस केस में भी अगर वीडियो के समय, बोतल की सच्चाई, या संदर्भ स्पष्ट नहीं है, तो किसी के खिलाफ
राय बनाना जल्दबाज़ी है। और यही बात बहुत से सपोर्ट करने वाले यूजर्स भी कह रहे
हैं—किसी की निजी जिंदगी को लेकर “गॉसिप” बनाना बंद होना चाहिए।
अब आगे क्या?
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया बहस और रिएक्शन तक सीमित है। लेकिन यह
घटना एक बार फिर यह सवाल उठा देती है कि इंटरनेट पर किसी को ट्रोल करने से पहले
लोगों को थोड़ी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। क्योंकि आज एक वीडियो पर ट्रोलिंग होती
है, कल किसी
और की फोटो पर।
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