ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भोपाल के रतिबाद थाना क्षेत्र में पंजाब किंग्स के क्रिकेटर शशांक सिंह, उनके पिता एवं मध्य प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड स्पेशल डायरेक्टर जनरल (डीजी) शैलेश सिंह और उनके ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत परिवार के यहां काम करने वाले एक रसोइए ने दर्ज कराई है, जिसमें मारपीट, गाली-गलौज और मोबाइल फोन छीनने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।
रसोइए ने क्या लगाए आरोप?
शिकायतकर्ता विपेंद्र सिंह तोमर, जो रीवा जिले के रहने वाले हैं, ने बताया कि उन्होंने 25 जून को नीलबाद स्थित बंगले में रसोइए के रूप में काम शुरू किया था। उनका दावा है कि उन्हें 15 हजार रुपये मासिक वेतन, रहने की जगह और भोजन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसी भरोसे पर उन्होंने नौकरी स्वीकार की और वहीं रहने लगे।
'मोबाइल वापस मांगा तो विवाद हुआ'
विपेंद्र तोमर का आरोप है कि कुछ दिनों बाद उनके काम में कमियां बताकर उनका मोबाइल फोन अपने पास रख लिया गया। शिकायत के अनुसार, 28 जून को नाश्ता तैयार करने के बाद उन्होंने शैलेश सिंह से अपना मोबाइल वापस मांगा, लेकिन उन्हें फोन नहीं दिया गया। इसके बाद वह अपने कमरे में चले गए।
मारपीट कर घर से निकालने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद शैलेश सिंह, उनके बेटे शशांक सिंह और ड्राइवर उनके कमरे में पहुंचे। वहां उनके साथ कथित रूप से गाली-गलौज की गई और हाथों व घूंसों से मारपीट की गई। विपेंद्र का यह भी आरोप है कि मारपीट के बाद उन्हें जबरन घर से बाहर निकाल दिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
रतिबाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर शैलेश सिंह, शशांक सिंह और उनके ड्राइवर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभी सामने नहीं आया आरोपियों का पक्ष
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी शैलेश सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं क्रिकेटर शशांक सिंह की ओर से भी इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने और सभी पक्षों के सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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