आजमगढ़ की अतरौलिया सीट पर सियासी संग्राम: ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद आमने-सामने
आजमगढ़ की अतरौलिया सीट को लेकर सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के संजय निषाद आमने-सामने आ गए हैं। सीट बंटवारे से पहले ही बयानबाजी ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है।
आजमगढ़ की अतरौलिया सीट पर सियासी संग्राम: ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद आमने-सामने
  • Category: उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बनी है आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट, जहां सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दल—सुभासपा और निषाद पार्टी—आमने-सामने आ गए हैं। सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के एक बयान ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया, जिसके बाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

 

राजभर के बयान से बढ़ा विवाद

गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचे ओमप्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी पार्टी जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अतरौलिया सीट भी उनकी रणनीति का हिस्सा है।

 

राजभर ने कहा कि आजमगढ़ किसी एक जाति या पार्टी का गढ़ नहीं है। यहां सभी वर्गों और समुदायों के लोग रहते हैं, इसलिए उनकी पार्टी हर सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी। उनके इस बयान को राजनीतिक विस्तार की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन गठबंधन के भीतर इसे लेकर असहमति सामने आ गई है।

 

निषाद पार्टी की नाराजगी

राजभर के बयान के बाद संजय निषाद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अभी तक सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है और न ही इस मुद्दे पर कोई औपचारिक चर्चा हुई है। ऐसे में किसी भी सीट पर दावा करना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है।

 

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अतरौलिया सीट पर निषाद पार्टी की पहली दावेदारी है, क्योंकि यह निषाद बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी का उम्मीदवार बहुत कम अंतर से हार गया था और इस बार जीत की पूरी संभावना है।

 

सीट न मिलने पर अलग राह की चेतावनी

संजय निषाद ने साफ शब्दों में कहा कि अगर गठबंधन में उनकी पार्टी को अतरौलिया सीट नहीं मिलती है, तो वे अपना उम्मीदवार उतारेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर उम्मीदवार निर्दलीय या पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ सकता है। यह बयान गठबंधन के भीतर संभावित टकराव की ओर इशारा करता है और यह दिखाता है कि सीट बंटवारे का मुद्दा कितना संवेदनशील हो सकता है।

 

“मर्यादा का पालन नहीं हुआ” – निषाद

संजय निषाद ने ओमप्रकाश राजभर पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिना किसी चर्चा के सीट पर दावा कर दिया, जो गठबंधन की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पहले बातचीत होनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अन्य दल भी इसी तरह एकतरफा फैसले लेने लगें, तो गठबंधन में संतुलन बिगड़ सकता है।

 

भाजपा को बताया ‘बड़ा भाई’

इस पूरे विवाद के बीच संजय निषाद ने भाजपा को “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा भाजपा के मार्गदर्शन में काम करती है। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सभी फैसले आपसी सहमति से होने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा की अब तक दी गई राजनीतिक सलाह उनके लिए फायदेमंद रही है और वे उसी के अनुसार आगे भी काम करेंगे।

 

अतरौलिया सीट का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण

अतरौलिया विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास और जातीय समीकरण इसे बेहद अहम बनाते हैं। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के संग्राम यादव 2012 से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं। उनके पिता बलराम यादव भी चार बार विधायक रह चुके हैं और मंत्री पद संभाल चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी, जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर थी, तब भी इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी।

 

जातीय समीकरण की भूमिका

अतरौलिया सीट पर जीत का गणित काफी हद तक जातीय समीकरणों पर निर्भर करता है। यहां यादव और मुस्लिम मतदाता मजबूत स्थिति में हैं, जबकि राजभर और निषाद समुदाय भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इसके अलावा दलित और सवर्ण मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि इस सीट पर हर पार्टी की नजर बनी रहती है।

 

राजभर की बढ़ती सक्रियता

ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ महीनों से लगातार आजमगढ़ का दौरा कर रहे हैं। इससे साफ है कि वह इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी और बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी।

 

अखिलेश यादव पर हमला

राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर बात नहीं करते और सिर्फ बयानबाजी करते हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार की प्राथमिकताएं गलत थीं।

 

योगी सरकार की तारीफ

राजभर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है और दंगे नहीं हो रहे हैं। उनका यह बयान भाजपा के साथ उनके मजबूत रिश्तों को भी दर्शाता है।

 

अतरौलिया सीट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद सिर्फ एक सीट का मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति का संकेत भी है। गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर असहमति, क्षेत्रीय दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षा और जातीय समीकरण—ये सभी कारक मिलकर आने वाले चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं।

 

अब यह देखना अहम होगा कि भाजपा इस विवाद को कैसे सुलझाती है और क्या गठबंधन एकजुट रह पाता है या नहीं। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव चुनावी रणनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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