ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर थाना टीम ने एक बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है।
पुलिस ने इस मामले में 11 साइबर ठगों को
गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली और मुंबई से मिलकर काम कर रहे
थे।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह लोगों को निवेश पर भारी मुनाफे का लालच
देकर ठगी करता था।
शिकायत कैसे सामने आई
पुलिस के
अनुसार 60 साल के एक वरिष्ठ नागरिक
से 22.67 लाख रुपये की ठगी की गई।
शिकायतकर्ता ए. श्रीनिवासन ने बताया कि उन्हें फेसबुक पर एक
विज्ञापन दिखा, जिसमें वित्त मंत्री के भाषण का दुरुपयोग
करते हुए एआई आधारित ट्रेडिंग से ज्यादा मुनाफे का दावा किया गया था।
विज्ञापन में दिए गए लिंक पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद कुछ लोगों ने
खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताकर फोन और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया।
इसके बाद शिकायतकर्ता को मुद्रोन ऐप और 9Pro प्लेटफॉर्म
पर रजिस्टर कराया गया।
ठगी का तरीका
पुलिस के
मुताबिक शिकायतकर्ता से क्रेओवियाह टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पैसा
निवेश कराया गया।
कुछ समय तक मुनाफे का लालच दिखाया गया और बाद में आरोपियों ने
संपर्क बंद कर दिया।
इसी के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि उनके साथ ठगी हो चुकी है।
मामले की जांच के लिए साइबर थाना पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई और
डिजिटल डेटा, कॉल डिटेल तथा मनी ट्रेल की जांच शुरू की।
दिल्ली में कैसे खुला नेटवर्क
जांच के
दौरान पुलिस को पता चला कि रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस में इस गैंग का नेटवर्क
चल रहा है।
पुलिस ने दोनों जगह छापेमारी कर तजिंदर सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा
और गिरिराज किशोर को गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि नेताजी सुभाष प्लेस में इन लोगों ने फर्जी
ऑफिस बना रखा था।
यहां से नकली बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर ठगों को सप्लाई किया
जाता था।
मुंबई और राजस्थान कनेक्शन
पूछताछ
में सामने आया कि ठगी की रकम कई खातों से होते हुए मुंबई के एक बैंक खाते में
पहुंचती थी।
इसके बाद पुलिस ने राजस्थान के बिजाई नगर, ब्यावर
में छापेमारी कर रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत, दीपक मेवाड़ा और त्रिलोक चंद नायक को गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक ये लोग फर्जी बैंक खाते जुटाकर उन्हें मुंबई में बैठे
पीके नाम के व्यक्ति को देते थे, जिसके जरिए ठगी की रकम आगे
ट्रांसफर की जाती थी।
विदेश से जुड़ा कनेक्शन और बरामदगी
जांच में
यह भी सामने आया कि गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए भारत में बैंक
खातों का इंतजाम करता था।
इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को घुमाया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 40 मोबाइल
फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक और
चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, 4 पैन कार्ड,
1 लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप, 2 पीओएस मशीन, 6 यूपीआई स्कैनर और 1 प्रिंटर बरामद किया है।
बैंक खाते खोलने में इस्तेमाल किए जाने वाले फर्जी दस्तावेज भी
बरामद किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक मामले में एफआईआर दर्ज है और इस नेटवर्क से
जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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