ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' इन दिनों विवादों के चलते चर्चा में है। फिल्म को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से इसे हटाने की खबर सामने आई, जिसके बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार दिलजीत के समर्थन में खुलकर सामने आ गए। अभिनेता-निर्देशक अनुराग कश्यप, अभिनेत्री गुल पनाग समेत कई फिल्मी हस्तियों ने कहा कि किसी फिल्म को बिना दर्शकों तक पहुंचाए हटाना सही तरीका नहीं है। उनका मानना है कि दर्शकों को खुद यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किसी फिल्म को देखना चाहते हैं या नहीं।
फिल्म को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर इसके कुछ हिस्सों और कलाकारों को लेकर आपत्तियां सामने आने लगीं। बढ़ते विवाद के बीच यह खबर आई कि ZEE5 ने फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। इसके बाद मनोरंजन जगत में सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मक आजादी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई कलाकारों ने कहा कि यदि किसी फिल्म पर सवाल हैं तो उसका समाधान संवाद के जरिए होना चाहिए, न कि उसे सीधे हटाकर।
निर्देशक अनुराग कश्यप ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी भी रचनात्मक काम का मूल्यांकन दर्शकों को करने देना चाहिए। उनके अनुसार किसी फिल्म को देखने या न देखने का फैसला जनता पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी विषय पर असहमति है तो उसके लिए चर्चा हो सकती है, लेकिन किसी फिल्म को पूरी तरह रोक देना सही रास्ता नहीं है।
अभिनेत्री गुल पनाग ने भी फिल्म के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में कला और सिनेमा को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि किसी भी फिल्म के बारे में राय बनाने से पहले उसे देखें और फिर अपना फैसला दें। उनके मुताबिक, बिना देखे किसी फिल्म के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य कलाकारों और फिल्मकारों ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि भारतीय सिनेमा में अलग-अलग विषयों पर फिल्में बनती रही हैं और दर्शक हमेशा यह तय करते आए हैं कि कौन-सी फिल्म सफल होगी और कौन-सी नहीं। ऐसे में किसी भी फिल्म को लेकर अंतिम फैसला दर्शकों पर ही छोड़ना चाहिए।
हालांकि दूसरी ओर कुछ संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने फिल्म के कुछ पहलुओं पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है और इसी वजह से फिल्म पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल इस विवाद पर ZEE5 की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि फिल्म को स्थायी रूप से हटाया गया है या यह अस्थायी फैसला है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध फिल्मों को लेकर निर्णय किस आधार पर लिए जाने चाहिए। फिल्म जगत के कई लोगों का मानना है कि यदि किसी कंटेंट पर विवाद है तो उसके समाधान के लिए बातचीत और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जाना चाहिए, ताकि रचनात्मक अभिव्यक्ति और दर्शकों के अधिकार दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
फिलहाल 'सतलुज' को लेकर विवाद जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि फिल्म दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस पूरे मामले ने फिल्म उद्योग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ओटीटी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
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