ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
बांग्लादेश की राजनीति में धर्म और कानून को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि देश में कुरान और सुन्नत के दायरे से बाहर कोई कानून नहीं बनाया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश आगामी चुनावों की तैयारी कर रहा है और राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे के साथ जनता को साधने की कोशिश में जुटे हैं।
“कुरान–सुन्नत से बाहर कानून नहीं बनेगा” – BNP
ठाकुरगांव सदर उपजिला में धार्मिक विद्वानों के साथ बैठक के दौरान मिर्जा फखरुल ने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि BNP शरीयत आधारित कानून नहीं चाहती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हकीकत इसके विपरीत है और पार्टी कुरान व सुन्नत के दायरे में रहकर ही कानून बनाने की पक्षधर है।
उनके अनुसार, “इस्लाम शांति का धर्म है और हम शांति चाहते हैं। चुनाव के जरिए हम एक शांतिपूर्ण नया बांग्लादेश बनाना चाहते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश की करीब 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और BNP ने हमेशा नागरिकों के धार्मिक मूल्यों और संस्कृति की रक्षा की है। उनके मुताबिक, पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
मौजूदा हालात पर गंभीर आरोप
BNP महासचिव ने देश की मौजूदा स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और “दुष्ट ताकतें” भ्रम और अशांति फैलाने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना था कि पिछले 15 वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया, अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा, बैंकों से लूट हुई और धन विदेशों में पहुंचा दिया गया। साथ ही ऐसे कानून बनाए गए जिनसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित हो गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं, उलेमा और विद्वानों को गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया। उन्होंने 2024 के जन आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों की मौत हुई और ढाका की सड़कों पर हिंसा देखी गई। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को झूठे मामलों में कैद रखने और इलाज न मिलने का मुद्दा उठाया।
तस्लीमा नसरीन की कड़ी प्रतिक्रिया
BNP के इस रुख पर प्रसिद्ध लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनके अनुसार BNP “मुस्लिम पहचान” के सहारे जमात-ए-इस्लामी से भी ज्यादा धार्मिक दल बनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कुरान और हदीस के आधार पर कानून लागू किए गए, तो महिलाओं और गैर-मुसलमानों को सबसे अधिक नुकसान होगा। उनके मुताबिक, ऐसे कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समान अधिकारों को सीमित कर सकते हैं।
“धार्मिक कानून सभ्यता के खिलाफ” – तस्लीमा का दावा
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि किसी भी आधुनिक और सभ्य देश में धार्मिक कानून नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि धार्मिक कानून कई बार महिलाओं, अल्पसंख्यकों और प्रगतिशील विचारों के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और समाज में भेदभाव, टकराव और असहिष्णुता बढ़ा सकते हैं।
चुनावी माहौल में गरमाती बहस
कुल मिलाकर, बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच धर्म और कानून को लेकर विवाद तेज हो गया है। एक ओर BNP धार्मिक मूल्यों के दायरे में कानून बनाने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर तस्लीमा नसरीन जैसे बुद्धिजीवी इसे नागरिक अधिकारों और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है और जनता की राय इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!