ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने चीन के दौरे पर जा रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ट्रंप 13 मई से 15 मई तक चीन में रहेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में व्यापार, ईरान युद्ध, ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और परमाणु हथियार जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
छह महीने बाद आमने-सामने होंगे दोनों नेता
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग करीब छह महीने बाद पहली बार आमने-सामने बातचीत करेंगे। व्हाइट हाउस की जानकारी के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच औपचारिक बैठक और कई अहम दौर की बातचीत होगी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
ईरान युद्ध पर रहेगा खास फोकस
इस मुलाकात का सबसे बड़ा मुद्दा मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध माना जा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में ट्रंप और शी जिनपिंग इस संकट को नियंत्रित करने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेता यह भी चर्चा करेंगे कि वैश्विक तनाव का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर कैसे पड़ रहा है।
व्यापार और टेक्नोलॉजी विवाद भी एजेंडे में
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच टैरिफ, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को लेकर कई विवाद चल रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने ईरान से जुड़े मामलों को लेकर कई चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें कुछ कंपनियां सैटेलाइट इमेजरी से जुड़ी थीं, जिन पर ईरान की मदद करने का आरोप लगाया गया। इसके अलावा अमेरिका ने चीन की कुछ रिफाइनरियों पर भी कार्रवाई की है, क्योंकि वे ईरान से कच्चा तेल खरीद रही थीं।
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों का किया विरोध
चीन ने अमेरिका के इन प्रतिबंधों का खुलकर विरोध किया है। बीजिंग का कहना है कि अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन अपने नागरिकों और कंपनियों के हितों की रक्षा करेगा और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
AI और ताइवान पर भी होगी चर्चा
ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। अमेरिका को चिंता है कि चीन तेजी से टेक्नोलॉजी और AI के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा ताइवान का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच बड़ा विवाद बना हुआ है। अमेरिका ताइवान का समर्थन करता है, जबकि चीन उसे अपना हिस्सा मानता है।
दुनिया की नजर इस बैठक पर
वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में सुधार होता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात तनाव कम करने में कितनी सफल होती है।
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