ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के पहले दौर के बाद एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने दी नई चेतावनी
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान अपने समझौते पर कायम नहीं रहता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो मैं वही करूंगा जो करना जरूरी होगा।" इससे पहले भी ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस बयान के बाद वार्ता के दौरान कुछ समय के लिए तनाव बढ़ गया था और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत बीच में छोड़ दी थी। बाद में मध्यस्थ देशों के प्रयासों से वार्ता फिर शुरू हुई।
स्विट्जरलैंड में क्या हुई सहमति?
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी समझौते के तहत दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में मिले। बैठक में दोनों पक्षों ने एक उच्च स्तरीय समिति बनाने पर सहमति जताई, जो आगे की बातचीत और समझौते के पालन की निगरानी करेगी।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही और इससे अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। हालांकि, ईरान ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर किसी प्रकार की सहमति बनी है।
ईरान को मिली आर्थिक राहत
समझौते के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 21 अगस्त तक ईरान को कुछ प्रतिबंधों से अस्थायी राहत दी है। इससे ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात तथा भुगतान प्राप्त करने की अनुमति मिल गई है। इसके अलावा विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की कुछ संपत्तियों को भी जारी किया गया है।
फ्रीज फंड को लेकर भी विवाद
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जारी की गई राशि का इस्तेमाल केवल अमेरिका से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जाना चाहिए, ताकि ईरान की जनता को राहत मिल सके। उनका कहना था कि इससे अमेरिकी किसानों को भी लाभ होगा। वहीं, ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुल नासेर हेम्माती ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ईरान किसी एक देश से कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इन फंड्स का उपयोग अन्य गैर-प्रतिबंधित आवश्यक आयात के लिए भी किया जा सकता है।
60 दिनों में स्थायी समझौते की कोशिश
वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान के अनुसार, दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टेलीफोन हॉटलाइन स्थापित करने का भी फैसला किया है।
आगे क्या होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिलहाल सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है। ट्रंप की नई चेतावनी और ईरान की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी आसान नहीं होगा। आने वाले 60 दिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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