ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव या संकट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक तेल सप्लाई मार्ग तैयार करने में जुट गए हैं।
क्यों इतना अहम है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यदि यह मार्ग किसी कारण से बाधित होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
ईरान पर लगे जहाजों से वसूली के आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में ईरान पर आरोप लगे हैं कि उसने होर्मुज से गुजरने वाले कुछ व्यापारिक जहाजों से सुरक्षित मार्ग देने के बदले भारी शुल्क या टैक्स की मांग की। इन घटनाओं के बाद खाड़ी देशों ने वैकल्पिक पाइपलाइन और नए निर्यात मार्गों पर काम तेज कर दिया है।
UAE और सऊदी अरब की बड़ी तैयारी
संयुक्त अरब अमीरात अपने नए वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद देश की तेल निर्यात क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही UAE अरब सागर के तट पर नया पोर्ट और कंटेनर टर्मिनल भी विकसित कर रहा है ताकि होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके। वहीं, सऊदी अरब भी लाल सागर तक जाने वाली अपनी तेल पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैकल्पिक मार्गों से निर्यात किया जा सके।
इराक भी तैयार कर रहा नया नेटवर्क
इराक भी लगभग 435 किलोमीटर लंबी बसरा-हदीथा पाइपलाइन पर काम कर रहा है। इस परियोजना को आगे सीरिया, जॉर्डन और तुर्की तक जोड़ने की योजना है। इसके पूरा होने पर प्रतिदिन लाखों बैरल तेल का परिवहन संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि नई पाइपलाइनें और वैकल्पिक मार्ग बनने के बाद भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं होगा। कई विश्लेषकों के अनुसार, भविष्य में भी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता रहेगा। इसके अलावा जिन नए मार्गों पर काम हो रहा है, उनमें से कई लाल सागर क्षेत्र से गुजरते हैं, जहां सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
यदि होर्मुज में तनाव जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन लागत और कई अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण खाड़ी देश लंबे समय के लिए ऐसे वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, जिससे किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम की जा सके।
अमेरिका-ईरान तनाव ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी है। इसी वजह से UAE, सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देश नए पाइपलाइन नेटवर्क और बंदरगाहों के जरिए तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते तैयार कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में होर्मुज का रणनीतिक महत्व पूरी तरह समाप्त होना आसान नहीं होगा
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!