ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर इटली में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इसकी वजह NATO के महासचिव मार्क रुटे का एक बयान बना, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान पर हमलों के दौरान इटली ने अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से विमानों को उड़ान भरने की अनुमति दी थी। इस बयान के बाद इटली की सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी।
क्या था NATO प्रमुख का बयान?
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में NATO महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि इटली सहित कई सहयोगी देशों के एयरबेस से हजारों उड़ानें संचालित हुईं, जिन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियान में सहयोग किया। रुटे के इस बयान को लेकर इटली में तुरंत राजनीतिक बहस शुरू हो गई। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि यदि इटली ने वास्तव में अमेरिकी हमलों में सहयोग दिया था, तो पहले इससे इनकार क्यों किया गया।
मेलोनी सरकार ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने NATO प्रमुख के बयान को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इटली ने अमेरिका को केवल पहले से मौजूद द्विपक्षीय समझौतों के तहत लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता से जुड़ी उड़ानों की अनुमति दी थी। मेलोनी के अनुसार, इटली के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर सीधे हमले करने वाले मिशनों के लिए नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके देश की नीति पहले जैसी ही है और इटली सीधे सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना।
रुटे पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
मेलोनी ने कहा कि NATO प्रमुख ने अलग-अलग प्रकार की उड़ानों को एक साथ जोड़कर ऐसा बयान दिया, जिससे यह गलत संदेश गया कि इटली ने ईरान पर सीधे हमलों के लिए अपने एयरबेस उपलब्ध कराए थे। उन्होंने कहा कि यह बयान उत्साह में दिया गया प्रतीत होता है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलतफहमी पैदा हुई। उनके अनुसार, लॉजिस्टिक सहायता और प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में स्पष्ट अंतर होता है।
ईरान को भी दी गई सफाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद इटली ने ईरान से भी संपर्क किया और अपने रुख को स्पष्ट किया। इटली ने दोहराया कि उसने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की और उसके एयरबेस का उपयोग केवल सीमित और पूर्व निर्धारित समझौतों के तहत ही हुआ। इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर करना और तनाव को कम करना बताया जा रहा है।
क्यों अहम है यह मामला?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय देशों की भूमिका लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में किसी भी देश के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को लेकर दिया गया बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। फिलहाल इटली अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है, लेकिन NATO प्रमुख के बयान के बाद शुरू हुआ यह विवाद दिखाता है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नेताओं के सार्वजनिक बयान किस तरह राजनीतिक और कूटनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं।
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