ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नेपाल में एक बार फिर Gen-Z आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। इस बार प्रदर्शन का केंद्र सरकार का वह फैसला है, जिसमें भूमिहीन झुग्गीवासियों को वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना अस्थायी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया। इस मुद्दे को लेकर राजधानी काठमांडू समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
भूमिहीन परिवारों के समर्थन में प्रदर्शन
संयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा के आह्वान पर काठमांडू के मैतीघर मंडला में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने, जबरन बेदखली रोकने और भूमिहीन परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मानवाधिकारों के सम्मान, अवैध गिरफ्तारियां रोकने और बेघर परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने की मांग वाले पोस्टर और तख्तियां भी उठाईं।
बाढ़ के बाद बढ़ी मुश्किलें
इस विवाद के बीच कीर्तिपुर स्थित एक अस्थायी आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भर गया। यहां रह रहे भूमिहीन परिवारों को सुरक्षाबलों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बताया गया कि इस केंद्र में लगभग 150 लोग रह रहे थे। इस घटना के बाद सरकार की पुनर्वास व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
युवा कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे Gen-Z से जुड़े कुछ युवा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस कार्रवाई में एक कार्यकर्ता घायल भी हुआ, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गगन कुमार थापा ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए गिरफ्तार लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की।
अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन
कोशी प्रांत के मोरांग जिले में भी Gen-Z कार्यकर्ताओं के समर्थन में प्रदर्शन हुआ। पुलिस के कथित दुर्व्यवहार के विरोध में धरना दे रहे 26 लोगों को भी हिरासत में लिया गया। इससे आंदोलन अब राजधानी से बाहर अन्य क्षेत्रों तक फैलता दिखाई दे रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
सरकार ने अप्रैल 2026 में काठमांडू घाटी सहित कई इलाकों में भूमिहीन लोगों की झुग्गियां और अस्थायी ढांचे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। इस अभियान से हजारों लोग प्रभावित हुए। बाद में कई परिवारों को अस्थायी आवास केंद्रों में रखा गया, लेकिन सरकार ने जुलाई की शुरुआत में इन केंद्रों को भी खाली करने का निर्देश दे दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना लोगों को हटाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है।
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
लगातार प्रदर्शन, गिरफ्तारियां और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच नेपाल सरकार पर इस मुद्दे का समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी पुनर्वास की ठोस योजना लागू होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।
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