ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के मुद्दे पर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) का दरवाजा खटखटाया है। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि भारत के इस फैसले से देश के 24 करोड़ लोगों की जल सुरक्षा और आजीविका प्रभावित हो सकती है। हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी।
UN में पाकिस्तान ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित बैठक में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की जीवनरेखा है। उनके अनुसार, देश की लगभग 90 प्रतिशत कृषि और 30 प्रतिशत से अधिक बिजली उत्पादन इसी नदी प्रणाली पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा और गैर-कानूनी तरीके से निलंबित किया है। पाकिस्तान का कहना है कि 1960 में हुई इस संधि में किसी भी पक्ष को इसे एकतरफा निलंबित करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
भारत पर लगाए ये आरोप
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में आरोप लगाया कि—
• भारत अब बाढ़ और जल प्रवाह से जुड़ा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा नहीं कर रहा।
• चेनाब नदी पर नई परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
• संयुक्त निरीक्षण के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को भारत आने की अनुमति नहीं दी जा रही।
• इससे पाकिस्तान में जल प्रबंधन, खेती और आपदा से निपटना मुश्किल हो सकता है।
भारत ने क्यों निलंबित की संधि?
भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की हत्या हुई थी, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।" भारत का कहना है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते।
भारत का स्पष्ट रुख
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह, विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
क्या है सिंधु जल संधि?
साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत—
• रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल भारत को मिला।
• सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के जल उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया।
यह संधि दशकों तक दोनों देशों के बीच जल सहयोग का आधार रही, लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यह विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
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