ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। खामेनेई की मौत के बाद यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम होगा, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या भारत की ओर से कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।
युद्ध के कारण टला था अंतिम संस्कार
अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान के दौरान मौत हो गई थी। हमलों में उनके आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था। शुरुआती कार्यक्रम के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 4 मार्च को होना था, लेकिन क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया। अब ईरानी प्रशासन ने अंतिम संस्कार कार्यक्रम की नई तारीखों की घोषणा की है। 4 जुलाई से श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू होंगे और 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
2 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मीद
ईरानी अधिकारियों के अनुसार तेहरान, कुम और मशहद में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक हो सकता है। सरकार ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों को निमंत्रण भेजा है। विशेष रूप से पड़ोसी और मित्र देशों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत और ईरान के रिश्तों पर नजर
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे पहले मई 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था और भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया था। इसी वजह से इस बार भी भारत की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दिलचस्पी बनी हुई है।
मशहद में ही क्यों होगा दफन?
खामेनेई के अंतिम संस्कार का मुख्य कार्यक्रम तेहरान में आयोजित होगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा। मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और शिया मुसलमानों का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित इमाम रजा की दरगाह दुनिया के प्रमुख इस्लामी तीर्थस्थलों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई को इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाने का फैसला उन्हें शिया इस्लाम के सबसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं की श्रेणी में और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।
ऐतिहासिक जनाजे की तैयारी
ईरान में इससे पहले 1989 में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। उस दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। इस बार ईरानी प्रशासन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर काम कर रहा है ताकि इतने बड़े आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!