ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके साथ ही वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। समारोह के दौरान भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, असम राइफल्स और नौसेना के मार्चिंग बैंड ने परेड में हिस्सा लिया। वहीं भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक भी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचे, जिसने दोनों देशों के मजबूत रक्षा संबंधों को और मजबूती दी।
सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस पर बने मुख्य अतिथि
प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने देश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में आमंत्रित किया था। इस अवसर पर भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मनाया गया। दौरे के दौरान राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' भी प्रदान किया। यह सम्मान दोनों देशों के गहरे संबंधों और भारत की क्षेत्रीय भूमिका को दर्शाता है।
भारत और चीन दोनों की नजर सेशेल्स पर क्यों?
सेशेल्स भले ही 115 द्वीपों वाला छोटा देश हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर का बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बनाती है। यही वजह है कि भारत और चीन दोनों इस द्वीपीय देश के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार राष्ट्रीय दिवस समारोह में दोनों देशों ने अपने-अपने युद्धपोत भेजे, जिसे हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जा रहा है। भारत के लिए सेशेल्स समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत के लिए क्यों अहम है सेशेल्स?
भारत का अधिकांश समुद्री व्यापार हिंद महासागर के रास्ते होता है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा भारत की आर्थिक और सामरिक जरूरतों से सीधे जुड़ी हुई है।चीन पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका, पाकिस्तान और मालदीव जैसे देशों में बंदरगाह विकसित कर अपनी समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इसे अक्सर 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति कहा जाता है। ऐसे में सेशेल्स भारत के लिए एक ऐसा रणनीतिक साझेदार है, जहां से हिंद महासागर में गतिविधियों पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
क्या है एजम्पशन आइलैंड परियोजना?
भारत और सेशेल्स के बीच एजम्पशन आइलैंड परियोजना सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना के तहत भारत वहां बुनियादी ढांचा, एयरस्ट्रिप और समुद्री सुविधाओं के विकास में सहयोग कर रहा है। इससे भारतीय नौसेना को अफ्रीका के पूर्वी तट और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के पास बेहतर लॉजिस्टिक सहायता मिलती है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स में कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम (CSRS) भी स्थापित किया है, जिससे समुद्री गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव हो पाती है।
मोदी ने दिया रक्षा सहयोग बढ़ाने का संदेश
सेशेल्स के राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, तटीय प्रबंधन, हाइड्रोग्राफी तथा रक्षा सहयोग के क्षेत्र में मिलकर आगे भी काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सेशेल्स का विश्वसनीय साझेदार बना रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स दौरा केवल एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे समय में जब चीन इस क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, भारत का सेशेल्स के साथ मजबूत रक्षा और कूटनीतिक सहयोग क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी हिंद महासागर की सुरक्षा और भारत की समुद्री रणनीति के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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