ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दिसंबर में अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। इस संभावना को लेकर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा संकेत दिया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक इस संभावित यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि इसी दौरान होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर यह दौरा संभव हो सकता है।
अमेरिका ने दोहराया निमंत्रण
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के लीडरशिप समिट में सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका प्रधानमंत्री मोदी का एक बार फिर स्वागत करने के लिए उत्सुक है। उन्होंने बताया कि हाल ही में भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि, इस यात्रा को लेकर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
व्यापार समझौते पर अंतिम दौर की बातचीत
सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हजारों उत्पादों और कई कानूनी पहलुओं पर सहमति बनना अभी बाकी है, इसलिए प्रक्रिया जटिल है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
रणनीतिक साझेदारी पर अमेरिका का भरोसा
गोर ने कहा कि अमेरिका, भारत को अपना विश्वसनीय और मजबूत रणनीतिक साझेदार मानता है। उनके अनुसार, भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और निवेश का स्तर भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस वर्ष के अंत तक दूसरी बार भारत का दौरा कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ट्रंप प्रशासन की भी भारत में दिलचस्पी
सर्जियो गोर के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ रिश्तों को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं। USISPF के मानद वरिष्ठ सलाहकार अल मेसन ने भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों में नई ऊर्जा आई है और दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।
कुछ चुनौतियां अब भी बरकरार
हालांकि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत होते दिख रहे हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सतर्कता भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति, पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के कुछ रुख और हाल के कुछ बयानों के कारण भारत पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। अमेरिकी विश्लेषक माइकल रुबिन ने भी पहले सलाह दी थी कि भारत को अमेरिका के साथ आगे बढ़ते समय सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है, लेकिन भारत को अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।
क्या हो सकता है इस यात्रा का महत्व?
यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिसंबर में अमेरिका दौरा होता है और इसी दौरान व्यापार समझौते को अंतिम रूप मिल जाता है, तो इससे भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में दोनों देशों की ओर से आने वाले दिनों में होने वाली घोषणियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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