ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिए कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संभावित युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण का स्क्रीनशॉट साझा किया।
शहबाज शरीफ ने दिया पाकिस्तान का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर लिखा, "अमेरिका और ईरान की सहमति के साथ, पाकिस्तान सम्मान के साथ तैयार है और इसे आयोजित करने के लिए सम्मानित महसूस करेगा ताकि चल रहे संघर्ष का समग्र समाधान निकाला जा सके।" ट्रंप ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक घंटे के भीतर पोस्ट किया।
यह कदम ट्रंप के लिए काफी बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहले कई बार दावा किया था कि अमेरिका ने युद्ध पहले ही जीत लिया है।
पाकिस्तान में वार्ता की संभावनाएं
ट्रंप ने पहली बार बातचीत का संकेत सोमवार को दिया था। इसके 12 घंटे के भीतर ही पाकिस्तान को वार्ता का संभावित मेज़बान माना जाने लगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने पहले ट्रंप के दावों का मजाक उड़ाया, लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मित्र देशों ने अमेरिका से वार्ता का संदेश भेजा है।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अगर वार्ता होती है तो ईरान की ओर से कौन प्रतिनिधि बनेगा। संभावना है कि संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ईरानी प्रतिनिधि होंगे।
अमेरिकी टीम और वार्ता का ढांचा
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार उनके दोस्त स्टीव विटकॉफ़ और दामाद जेरेड कुश्नर इस सप्ताह ईरानी प्रतिनिधिमंडल से पाकिस्तान में मिल सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
असीम मुनीर की भूमिका
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। पाकिस्तान के पूर्व ओमान राजदूत इमरान अली चौधरी ने बताया कि मुनीर ने लगभग दो से ढाई हफ्ते पहले विटकॉफ़ और कुश्नर से मुलाकात की थी। हालांकि, असीम मुनीर ने इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ट्रंप की विदेश नीति में पाकिस्तान
ट्रंप के कार्यकाल में पाकिस्तान उनकी विदेश नीति का नियमित हिस्सा रहा है, खासकर उनके नोबेल शांति पुरस्कार के प्रयासों में। ट्रंप जिन आठ युद्धों को समाप्त करने का दावा करते हैं, उनमें भारत-पाकिस्तान के मई 2025 के सैन्य संघर्ष को भी शामिल किया गया। इस दौरान भारत ने स्पष्ट किया था कि उसने केवल पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम पर सहमति दी।
पाकिस्तानी अधिकारी असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग भी की थी। इससे यह साफ होता है कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो गई है। वार्ता अगर सफल होती है, तो यह क्षेत्र में स्थिरता और शांति के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। ट्रंप और उनके वार्ताकारों की इस प्रक्रिया में सक्रियता के कारण पाकिस्तान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ता के लिए सम्मानजनक मेज़बान के रूप में प्रस्तुत किया है।
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