ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के विमानन क्षेत्र में एक नए मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। यह देश का पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा, जहां प्रति यात्री सरकार को सीधे राजस्व प्राप्त होगा। इस नई व्यवस्था के तहत एयरपोर्ट संचालन करने वाली कंपनी हर यात्री पर ₹400 से अधिक राशि सरकार को देगी।यह पहल भारतीय विमानन क्षेत्र में अनोखी मानी जा रही है और इसे सफल मानते हुए अन्य राज्य जैसे कर्नाटक, राजस्थान और तमिलनाडु भी इसी मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में नया राजस्व मॉडल
अब तक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में सरकार और ऑपरेटर के बीच लाभांश साझेदारी होती थी। इससे सरकार की कमाई हमेशा अनिश्चित रहती थी।नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में प्रति यात्री तय राजस्व मॉडल लागू किया गया है, जो निवेशकों और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस प्रोजेक्ट में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश (FDI) है और ग्लोबल बिडिंग के जरिए विदेशी कंपनी का चयन किया गया।
जमीन अधिग्रहण और सामाजिक मूल्यांकन
नोएडा एयरपोर्ट परियोजना के लिए कुल 5428 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है, जिसमें पुनर्वास की जमीन भी शामिल है। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत यह देश की सबसे बड़ी अधिग्रहण प्रक्रियाओं में से एक है।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने इस प्रोजेक्ट में सोशल इंपैक्ट असेसमेंट की जिम्मेदारी संभाली। इसके जरिए विश्वविद्यालय ने क्षेत्रीय विकास और सामाजिक प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया और अब यह अन्य प्रोजेक्ट्स में विशेषज्ञता हासिल कर चुका है।
निर्माण और लोकार्पण
एयरपोर्ट की साइट क्लियरेंस, निर्माण और लोकार्पण की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी की गई। इसकी कार्यप्रणाली अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन गई है।लोकार्पण कार्यक्रम की तैयारियों के तहत जिला प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और दो लाख से अधिक लोगों की जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की सफलता के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है।
औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, एयरपोर्ट के संचालन से ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। नए एयरपोर्ट से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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