ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की। हालांकि लेबनान में जारी संघर्ष और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर मतभेद साफ तौर पर सामने आए। इस बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हुए, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया।
तनाव कम करने के लिए शुरू हुई बातचीत
यह वार्ता हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई है। इसका उद्देश्य पिछले चार महीनों से जारी तनाव को कम करना और भविष्य में एक व्यापक एवं स्थायी समझौते का रास्ता तैयार करना है। बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक से पहले ईरान ने स्पष्ट कर दिया था कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब अमेरिका अपने किए गए वादों को पूरा करेगा।
80 मिनट चली पहली बैठक
पहले दौर की बातचीत करीब 80 मिनट तक चली। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार इस दौरान युद्धविराम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के लिए एक प्रारंभिक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क लगभग तैयार हो चुका है। इसके अलावा कतर की मध्यस्थता से फ्रीज किए गए फंड जारी करने के विकल्पों पर भी बातचीत हुई।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
वार्ता के बीच उस समय तनाव बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी संगठनों को नियंत्रित करे, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चला गया। ईरानी मीडिया के अनुसार यह कदम ट्रंप के बयान पर विरोध दर्ज कराने के लिए उठाया गया था।
ईरान और अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना हर परिस्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माहौल को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि इस तरह की संवेदनशील वार्ताओं में मतभेद और तनाव सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थायी शांति और कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
स्थायी समझौते की दिशा में उम्मीद
हालांकि बैठक के दौरान कुछ समय के लिए बातचीत प्रभावित हुई, लेकिन दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे भी इसी तरह बातचीत जारी रही तो परमाणु समझौते, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रगति संभव है।
स्विट्जरलैंड में हुई यह बैठक मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि लेबनान संकट और राजनीतिक बयानबाजी अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं, लेकिन दोनों देशों का बातचीत जारी रखने का फैसला भविष्य में किसी व्यापक समझौते की उम्मीद को मजबूत करता है।
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