ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले करने के दावे किए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर पांच घंटे तक अभियान चलाने की जानकारी दी है, जबकि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।
अमेरिका ने कई सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ करीब पांच घंटे तक सैन्य अभियान चलाया गया। अमेरिका का कहना है कि इस दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य ईरान के रक्षा तंत्र, मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम, ड्रोन ठिकानों और नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करना था। साथ ही यह भी बताया गया कि मध्य पूर्व में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का किया दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अल-जुफैर में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार, इस हमले में हथियार भंडार, सैटेलाइट संचार केंद्र और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े एक भवन को लक्ष्य बनाया गया। इसके अलावा IRGC ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तेल बाजार पर दिखा युद्ध का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक ईंधन आपूर्ति, शिपिंग और महंगाई पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
हॉर्मुज क्षेत्र बना तनाव की बड़ी वजह
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पहले शांति समझौते की दिशा में बातचीत हुई थी। लेकिन हॉर्मुज क्षेत्र में दो जहाजों पर हुए हमलों के बाद तनाव फिर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार का दावा किया। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के कारण आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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