ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के चार दिन बाद एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया। भूकंप के करीब 96 घंटे बाद एक पिता और उनके बेटे को मलबे से जीवित बाहर निकाला गया। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े भूकंप के बाद 72 घंटे बीतने के बाद जीवित लोगों के मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है। ऐसे में चार दिन बाद दोनों का सुरक्षित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
मलबे के नीचे चार दिन तक जिंदगी की जंग
बचाव दल जब दोनों को बाहर लेकर आया तो उनके शरीर मिट्टी से ढके हुए थे और उन्होंने कपड़े भी नहीं पहन रखे थे। माना जा रहा है कि लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के दौरान उन्होंने खुद को जीवित रखने की कोशिश में ऐसा किया होगा। बचावकर्मियों ने दोनों को कपड़े से बने अस्थायी स्ट्रेचर पर लिटाकर मलबे से बाहर निकाला और फिर एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
डॉक्टरों ने तुरंत शुरू किया इलाज
फ्रांसीसी सिविल सिक्योरिटी टीम के एक सदस्य ने बताया कि दोनों बेहद कमजोर थे, जो चार दिन तक मलबे में फंसे रहने के बाद स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि दोनों को धीरे-धीरे शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए दवाएं और इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड दिए गए। पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ की गई ताकि उनकी हालत और न बिगड़े।
अंतरराष्ट्रीय बचाव दल ने संभाली कमान
रेस्क्यू ऑपरेशन में फ्रांस की सिविल सिक्योरिटी टीम और अमेरिका के वर्जीनिया स्थित फेयरफैक्स काउंटी अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू दल के विशेषज्ञ शामिल थे।इससे एक दिन पहले इसी टीम ने मलबे से एक महिला और उसके 9 महीने के बच्चे को भी सुरक्षित बाहर निकाला था। बचाव दल ने विशेष सर्च कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों का पता लगाया।
अब भी हजारों लोग लापता
राहत एजेंसियों के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान कम से कम 33 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। हालांकि, हजारों लोगों के अब भी लापता होने की खबर है, जिससे राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। समय बीतने के साथ जीवित लोगों को ढूंढना और कठिन होता जा रहा है, लेकिन बचाव दल उम्मीद नहीं छोड़ रहा है।
भूकंप में 1,450 से अधिक लोगों की मौत
वेनेजुएला में बुधवार को आए इस भीषण भूकंप ने सबसे ज्यादा तबाही तटीय राज्य ला गुएरा में मचाई। अब तक कम से कम 1,450 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर सफल रेस्क्यू इस बात का संकेत है कि राहत अभियान जारी रखना कितना जरूरी है।
उम्मीद की नई किरण
96 घंटे बाद पिता-पुत्र का जीवित मिलना राहतकर्मियों और पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आपदा के सबसे कठिन दौर में भी उम्मीद और जीवन की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती।
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