ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं माना जा रहा। रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों पर भी खतरा मंडरा रहा है, और अगर इन्हें नुकसान पहुंचा तो भारत समेत कई देशों की डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
इंटरनेट का असली रास्ता जमीन पर नहीं, समुद्र के नीचे है
बहुत से लोग सोचते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट से चलता है, लेकिन दुनिया का ज्यादातर डेटा समुद्र के नीचे बिछी केबलों से गुजरता है। वीडियो कॉल, ईमेल, बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट और एआई सेवाएं बड़े पैमाने पर इन्हीं केबलों पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लाल सागर और होर्मुज इलाके में करीब 20 बड़ी केबलें मौजूद हैं। इनमें से 17 केबलें लाल सागर से गुजरती हैं और यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं, जबकि AEAE-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा TGN गल्फ जैसी केबलें होर्मुज के रास्ते से होकर गुजरती हैं और भारत के अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्शन को मजबूत करती हैं।
खतरा कहां से है
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि होर्मुज के इलाके में समुद्र के भीतर सुरंगें या खतरनाक चीजें बिछाई गई हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लाल सागर में ईरान समर्थित हूथी समूह जहाजों पर हमले कर रहे हैं, और ये वही इलाके हैं जिनके नीचे इंटरनेट केबलों का बड़ा नेटवर्क है।
यही बात दुनिया की चिंता बढ़ाती है। अगर समुद्री रास्ते असुरक्षित होते हैं, तो सिर्फ जहाज नहीं रुकते, डिजिटल दुनिया की रीढ़ भी हिल सकती है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि होर्मुज से गुजरने वाली कुछ केबलें सीधे भारत के इंटरनेट नेटवर्क को मजबूती देती हैं। इसका मतलब यह है कि अगर इस क्षेत्र में केबलों को नुकसान हुआ, तो भारत में अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, कॉरपोरेट नेटवर्क और डिजिटल लेनदेन तक प्रभावित हो सकते हैं।
यह असर हमेशा “इंटरनेट बंद” के रूप में नहीं दिखता। कई बार स्पीड धीमी होती है, लेनदेन रुकते हैं, सर्वर जवाब देना बंद करते हैं, और बड़ी टेक कंपनियों की सेवाओं में रुकावट आने लगती है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था क्यों डर रही है
रिपोर्ट के अनुसार अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों ने यूएई और सऊदी अरब में बड़े डेटा सेंटर बनाए हैं, जो इन समुद्री केबलों से जुड़े हुए हैं। अगर इन केबलों पर हमला होता है, तो सिर्फ इंटरनेट सेवा नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आज दुनिया का कारोबार डिजिटल नेटवर्क पर टिका है। अगर बैंकिंग रुकी, पेमेंट अटके और एआई सेवाएं बाधित हुईं, तो इसका असर आम आदमी से लेकर बड़े उद्योग तक सब पर पड़ेगा।
क्यों गंभीर है यह चेतावनी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि होर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में पानी की गहराई करीब 200 फीट है, इसलिए वहां केबलों को नुकसान पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यही वजह है कि यह खतरा अब सिर्फ सैन्य या नौवहन का मुद्दा नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा का भी मुद्दा बन गया है।
इस पूरी स्थिति का सबसे बड़ा सबक यही है कि आधुनिक युद्ध केवल मिसाइलों और टैंकों से नहीं लड़ा जाता। आज समुद्र के नीचे बिछी एक केबल भी उतनी ही अहम है जितना कोई बड़ा तेल ठिकाना।
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