ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिका द्वारा डुबोए जाने के बाद भारत में भी सियासी तूफान उठ गया है। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका और चुप्पी पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस झूठ और गलत जानकारी फैला रही है। देखते ही देखते यह मामला विदेश नीति, समुद्री सुरक्षा और घरेलू राजनीति—तीनों का मिश्रण बन गया।
कांग्रेस के सवाल क्या हैं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पूछा कि अगर देश अपने आसपास हो रही इतनी बड़ी घटनाओं पर कोई साफ प्रतिक्रिया नहीं दे सकता, तो फिर हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा भूमिका पर बड़े-बड़े दावे क्यों किए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय झंडे वाले कमर्शियल जहाज और 1,100 नाविक फंसे हुए हैं। खरगे ने दो भारतीय नाविकों की कथित मौत का भी जिक्र किया और पूछा कि कोई समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं दिख रहा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सिर्फ 25 दिन का क्रूड और तेल स्टॉक बचा है, तब भारत की ऊर्जा आपात योजना क्या है।
कांग्रेस का रुख साफ है—वह इस घटना को सिर्फ एक विदेशी सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, ऊर्जा और कूटनीति से जुड़ा मुद्दा बता रही है। इसी वजह से उसने सरकार की चुप्पी को मुख्य सवाल बनाया।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस एक बार फिर हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हुए अमेरिकी सबमरीन हमले के लिए भारतीय सरकार को दोषी ठहराकर सरासर झूठ और गलत जानकारी फैला रही है। पार्टी ने इसे हताशा से प्रेरित, राजनीति से संचालित और बदनाम करने वाली मुहिम बताया। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस के दावे न सिर्फ गुमराह करने वाले हैं, बल्कि पूरी तरह झूठे हैं और सस्ते राजनीतिक फायदे के लिए भारत की संप्रभुता तथा राजनयिक फैसलों को कमजोर करने के लिए तैयार किए गए हैं।
यानी बीजेपी इस पूरे विवाद को विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है। उसके मुताबिक, सरकार पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है और कांग्रेस वही नहीं कर रही।
हमला कहां हुआ, इसी पर बहस का केंद्र
बीजेपी ने दावा किया कि यह हमला भारतीय जल सीमा में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में हुआ। पार्टी के अनुसार यह स्थान श्रीलंका के तट से करीब 74 किलोमीटर दूर था और भारत के समुद्री अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उसने यह भी कहा कि यह घटना भारत के तट से 250 नॉटिकल मील या उससे ज्यादा दूरी पर हुई, यानी भारतीय टेरिटोरियल वाटर्स और एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन से काफी आगे।
पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश की भौगोलिक नजदीकी भर से वह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई घटना के लिए जिम्मेदार नहीं हो जाता। इसी तर्क के आधार पर बीजेपी कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन बता रही है।
भारतीय नौसेना की भूमिका पर क्या कहा गया
बीजेपी ने यह भी कहा कि घटना श्रीलंका के SAR जोन में होने के बावजूद जैसे ही MRCC कोलंबो को संकट की सूचना मिली, भारतीय नौसेना ने तुरंत सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पार्टी के अनुसार कुछ ही घंटों में लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान तैनात किया गया, हवा से गिराए जा सकने वाले लाइफ राफ्ट वाले दूसरे विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया, INS तरंगिनी को डायवर्ट किया गया और INS इक्षक को कोच्चि से रवाना किया गया।
यह बिंदु बीजेपी के बचाव का सबसे अहम हिस्सा है, क्योंकि इससे वह यह दिखाना चाहती है कि भारत ने अपने मानवीय और रणनीतिक दायित्वों को नजरअंदाज नहीं किया।
मुद्दा सिर्फ हमला नहीं, नैरेटिव का भी है
इस पूरे विवाद में साफ दिखता है कि लड़ाई सिर्फ एक समुद्री घटना की नहीं, बल्कि उसके नैरेटिव की भी है। कांग्रेस इसे सरकार की कमजोरी और चुप्पी से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी इसे विपक्ष की “भारत विरोधी बयानबाजी” कह रही है। आने वाले दिनों में यह बहस और बढ़ सकती है, क्योंकि इसमें विदेश नीति, ऊर्जा संकट, नौसैनिक तैयारी और राजनीतिक विश्वसनीयता—सब शामिल हो चुके हैं।
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