ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और रूस से तेल खरीद के मुद्दे को लेकर सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। खरगे ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तानाशाह बताते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी बातों के आगे झुक रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
कर्नाटक में सभा को संबोधित करते हुए दिया बयान
मल्लिकार्जुन खरगे कर्नाटक के चित्तपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने करीब 1069 करोड़ रुपये के विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर तीखी टिप्पणी की।
खरगे ने आरोप लगाया कि ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के बीच भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता (Strategic Autonomy) को वॉशिंगटन के सामने कमजोर किया जा रहा है।
ट्रंप को बताया तानाशाह
अपने भाषण में खरगे ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तानाशाह बताया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहना चाहिए। खरगे ने यह भी कहा कि भारत को किसी भी देश के दबाव में आकर फैसले नहीं लेने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को किसी दूसरे देश के आदेशों का पालन करना चाहिए।
रूसी तेल को लेकर उठाया सवाल
खरगे का यह बयान उस समय आया जब अमेरिका ने कहा था कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी गई है। इस बयान के आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की सरकार अमेरिकी दबाव में काम कर रही है। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया।
सरकार की ओर से कहा गया कि भारत को किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होती। यह छूट केवल ट्रांजिट में मौजूद तेल की आपूर्ति से जुड़े तकनीकी मामलों को लेकर थी।
ईरान के मुद्दे पर भी अमेरिका की आलोचना
खरगे ने अपने भाषण में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के मुद्दे पर भी अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के नेता को निशाना बनाना दुनिया की शांति के लिए खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक अगर किसी देश का नेता मारा जाता है तो इसका असर सिर्फ उस देश पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता पर पड़ता है।
भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत की विदेश नीति पहले दुनिया में सम्मान के साथ देखी जाती थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय की विदेश नीति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में गुट निरपेक्ष आंदोलन के जरिए भारत ने दुनिया में शांति और संतुलन की नीति अपनाई थी।
खरगे ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के समय भारत की विदेश नीति की वैश्विक पहचान कमजोर हो रही है। उनके इस बयान के बाद देश की राजनीति में विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
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