ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और सक्रिय कूटनीतिक भूमिका दिखाने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस, जॉर्डन, ओमान, मलेशिया और कतर के शीर्ष नेताओं से बात कर क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई और तनाव कम करने पर जोर दिया।
बातचीत का मुख्य संदेश क्या था
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इन नेताओं से अलग-अलग बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हमले निंदनीय हैं और उनसे अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने शांति, सुरक्षा और स्थिरता की जल्दी बहाली के लिए संवाद और कूटनीति को जरूरी बताया।
भारत की यह लाइन अहम इसलिए है क्योंकि वह सीधे किसी एक पक्ष का समर्थन करने की जगह स्थिरता, नौवहन और ऊर्जा सुरक्षा की बात कर रहा है। यह वही दृष्टिकोण है जो भारत अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों में अपनाने की कोशिश करता है।
जॉर्डन और फ्रांस से क्या बात हुई
रिपोर्ट के अनुसार मोदी ने जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय को ईद की शुभकामनाएं दीं और पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और जॉर्डन माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन के लिए प्रतिबद्ध हैं और क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में जॉर्डन के प्रयासों की सराहना की।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत में भी प्रधानमंत्री ने तनाव कम करने की तत्काल जरूरत और संवाद की ओर लौटने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने क्षेत्र और उससे आगे शांति व स्थिरता बढ़ाने के लिए घनिष्ठ समन्वय जारी रखने की बात कही।
ओमान और कतर क्यों खास हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने ओमान के सुल्तान हैतम बिन तारिक से बात में तनाव कम करने और शांति बहाल करने के लिए संवाद को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। उन्होंने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा दोहराई तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में उसके प्रयासों की सराहना की।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कतर के साथ एकजुटता से खड़ा है और ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने भारतीय समुदाय को दिए गए समर्थन के लिए आभार भी जताया और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन का समर्थन दोहराया।
मलेशिया से भी जुड़ी कड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया के प्रधानमंत्री से बात में भी प्रधानमंत्री मोदी ने ईद की शुभकामनाएं दीं और पश्चिम एशिया की बेहद चिंताजनक स्थिति पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने तथा जल्द शांति बहाल करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
यह दिखाता है कि भारत इस संकट को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, व्यापक इस्लामी दुनिया और वैश्विक स्थिरता के नजरिए से भी देख रहा है।
भारत की चिंता क्या है
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, जॉर्डन, इजरायल और ईरान समेत कई नेताओं से भी बात की है।
यानी भारत केवल बयान नहीं दे रहा, बल्कि लगातार संपर्क बनाए हुए है। इससे साफ है कि ऊर्जा सुरक्षा, भारतीयों की सुरक्षित वापसी और समुद्री रास्तों की स्थिरता भारत की प्राथमिक चिंताएं हैं।
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