ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस की उड़ान कुछ ही मिनटों में त्रासदी बन गई। 23 फरवरी की शाम 7:11 बजे उड़ान भरने के बाद विमान झारखंड के चतरा जिले में क्रैश हो गया। इस हादसे में विमान में मौजूद सभी 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, अटेंडेंट और दोनों पायलट शामिल थे। यह खबर आते ही पूरे देश में एयर एम्बुलेंस की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे।
उड़ान के बाद क्या हुआ?
उड़ान के दौरान मौसम खराब होने की बात सामने आई। इसी वजह से पायलट ने रूट बदलने की अनुमति मांगी थी। लेकिन रूट बदलने की बात के कुछ देर बाद ही संपर्क टूट गया। शाम करीब 7:34 बजे के आसपास रडार कॉन्टैक्ट भी नहीं रहा। जब एक विमान इस तरह अचानक “गायब” हो जाए, तो समझिए मामला कितना गंभीर हो सकता है।
कौन-कौन थे विमान में
इस हादसे में मरीज संजय कुमार (41) भी थे, जिन्हें गंभीर जलने की चोटें थीं। साथ में डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, पैरामेडिकल स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा, अटेंडेंट अर्चना देवी और धुरु कुमार, और पायलट विवेक विकास भगत व सवरजदीप सिंह मौजूद थे। एयर एम्बुलेंस का मतलब ही होता है—समय के खिलाफ लड़ाई। लेकिन यहां वही उड़ान जानलेवा बन गई।
मौसम बनाम तकनीकी सवाल
हादसे के बाद पहला सवाल यही है—क्या सिर्फ मौसम वजह था? खराब मौसम में उड़ान जोखिम बढ़ाती है, लेकिन असली कारण कई बार तकनीकी, ऑपरेशन या निर्णय से भी जुड़ा होता है। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी यही कहा कि मौसम वजह हो सकता है, लेकिन सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
एयर एम्बुलेंस और चार्टर उड़ानों पर नई बहस
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स यानी चार्टर और एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा पर पहले से नजर है। DGCA की तरफ से स्पेशल ऑडिट जैसी बातें भी चर्चा में हैं। आम लोगों के मन में अब सवाल है—क्या नियम पर्याप्त सख्त हैं? क्या निगरानी ठीक से हो रही है? और क्या मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर सुरक्षा से समझौता तो नहीं हो रहा?
परिवारों का दर्द और सिस्टम की जिम्मेदारी
हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, वे सिर्फ “यात्री” नहीं थे—वे किसी के पिता, किसी की मां, किसी के बेटे-बेटी थे। खासकर मरीज के परिवार के लिए यह दोहरा सदमा है—इलाज की उम्मीद और फिर मौत की खबर। अब जरूरत है कि जांच तेजी से हो, और जो भी वजह निकले, उसके आधार पर सिस्टम में सुधार हो ताकि फिर किसी परिवार को ऐसा दिन न देखना पड़े।
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