जश्न बना मातम: आरसीबी की जीत के इवेंट में भगदड़ से गईं 11 जानें
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी के जश्न के दौरान फ्री टिकट की अफवाह से मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई। जानिए पूरी घटना कैसे घटी और क्या लापरवाही हुई।
जश्न बना मातम: आरसीबी की जीत के इवेंट में भगदड़ से गईं 11 जानें
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बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी की पहली आईपीएल ट्रॉफी जीतने की खुशी में आयोजित जश्न का माहौल मातम में बदल गया, जब भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए।

हजारों की भीड़ का अचानक गेट नंबर 7 की ओर उमड़ना, और यह अफवाह कि वहां फ्री टिकट बांटे जा रहे हैं, इसने कुछ ही मिनटों में एक भयावह स्थिति पैदा कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अफवाह फैलते ही गेट 7 पर हजारों लोग इकट्ठा हो गए। भीड़ बेकाबू हो गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लोग सांस नहीं ले पा रहे थे, जमीन पर गिर गए और कुछ लोगों की तो वहीं मौत हो गई।


अचानक बारिश ने और बढ़ाई तबाही

हालात पहले ही बिगड़ रहे थे कि इसी बीच करीब शाम 5.30 बजे तेज बारिश शुरू हो गई।

लोगों के पास छुपने की जगह नहीं थी और अधिकतर प्रशंसक गेट्स की ओर भागे। इससे भीड़ और घनी हो गई और भगदड़ की स्थिति और खराब हो गई।

चिन्नास्वामी स्टेडियम में कुल 13 गेट हैं, लेकिन गेट नंबर 7 पर सबसे ज्यादा हताहत हुए। यहां फ्री टिकट बंटने की अफवाह सबसे पहले फैली थी और इसी रास्ते से टीम का मेन एंट्री रूट भी तय किया गया था।


प्रशासन की लापरवाही या भीड़ का उन्माद?

विजय परेड और इस इवेंट को लेकर प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट योजना या नियंत्रण नजर नहीं आया। अनुमान के मुताबिक, 2 से 3 लाख लोग इस जश्न में शामिल हुए, जबकि स्टेडियम की क्षमता सिर्फ 35,000 दर्शकों की है।

स्थानीय लोगों और प्रशंसकों ने बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “पुलिस सिर्फ लोगों को धक्का दे रही थी, कोई योजना नहीं थी।”


पुलिस का संघर्ष और लाठीचार्ज

स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को कब्बन पार्क सर्किल के पास शाम 6.30 बजे के करीब लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके बावजूद भीड़ बेकाबू रही और एम्बुलेंस तक को घायलों को ले जाने में संघर्ष करना पड़ा।

एक प्रशंसक, सिंचन एन ने कहा, “मैं इसलिए बच पाई क्योंकि मैं देर से पहुंची। वहां हालात बेहद खतरनाक हो गए थे, पुलिस का रवैया भी आक्रामक था।”


मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने जताया दुख

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि इस हादसे की न्यायिक जांच करवाई जाएगी और मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी भीड़ की कल्पना किसी ने नहीं की थी।

वहीं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि भीड़ ने गेट तोड़ दिए, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि वे घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।


क्या ये हादसा रोका जा सकता था?

यह सवाल अब हर किसी के मन में है कि क्या इस भयानक हादसे को टाला जा सकता था? क्या प्रशासन को पहले से तैयार रहना चाहिए था? क्या सोशल मीडिया और सार्वजनिक घोषणाओं के ज़रिए भीड़ को नियंत्रण में रखा जा सकता था?

फिलहाल न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन यह घटना कई स्तरों पर प्रशासनिक लापरवाही और भीड़ प्रबंधन की विफलता को उजागर करती है।

उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।

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