ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के एक हाईराइज आवासीय परिसर में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग असल में कितने सुरक्षित हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इंदिरापुरम की एक सोसायटी में लगी आग में कई फ्लैट बुरी तरह प्रभावित हुए और लोगों को रेस्क्यू करना पड़ा।
सबसे राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन हादसे ने डर, अफरातफरी और सुरक्षा व्यवस्था की पोल जरूर खोल दी।
रिपोर्टों
के अनुसार करीब 10 लोगों को बचाया गया, जिनमें एक किशोर और दो बुजुर्ग
भी शामिल थे।
करीब आठ फ्लैट आग की चपेट में आए, हालांकि
नुकसान का पूरा आकलन बाद में किया जाना था।
हाईराइज में सबसे बड़ी दिक्कत क्या होती है
ऊंची
इमारतों में आग लगने का खतरा सिर्फ आग तक सीमित नहीं रहता। धुआं, घबराहट, संकरी निकासी, बंद गलियारे और ऊपरी मंजिलों तक राहत
पहुंचाने में लगने वाला समय भी बड़ा संकट बन जाता है।
इसी वजह से हाईराइज सोसायटियों में फायर सेफ्टी कोई औपचारिक कागजी
नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का बुनियादी हिस्सा है।
ऐसी
घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि कई सोसायटियों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, होज़ रील, स्मोक सेंसर या इमरजेंसी ड्रिल जैसी चीजें
या तो नियमित रूप से जांची नहीं जातीं, या फिर निवासी खुद
उनसे परिचित नहीं होते।
जब तक हादसा न हो, लोग अक्सर मानकर चलते हैं
कि सब ठीक है।
क्या सावधानियां जरूरी हैं
हर
हाईराइज सोसायटी में सबसे पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि फायर फाइटिंग सिस्टम
चालू हालत में हों।
निवासियों को यह पता होना चाहिए कि अलार्म बजने पर कौन-सा रास्ता
लेना है, लिफ्ट का उपयोग नहीं करना है, और धुएं से बचते हुए नीचे कैसे आना है।
सामान्य तौर
पर परिवारों को अपने घर में वायरिंग, AC, एक्सटेंशन बोर्ड और ओवरलोड पावर प्वाइंट्स की
समय-समय पर जांच करानी चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को भी यह सिखाना जरूरी है कि आपात स्थिति में
घबराने के बजाय क्या करना है।
रिपोर्टों
के मुताबिक आग पर काबू पा लिया गया और रेस्क्यू ऑपरेशन में कई लोगों को सुरक्षित
निकाल लिया गया।
अब इस घटना के बाद गाजियाबाद-नोएडा जैसे हाईराइज इलाकों में सोसायटी
फायर ऑडिट और सुरक्षा निर्देशों की चर्चा फिर तेज हो गई है।
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