ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया बिना ठोस कारण के नहीं रोकी जा सकती। इस फैसले के बाद यह मामला अब तय समय के अनुसार आगे बढ़ेगा और सुनवाई जारी रहेगी।
जन सुनवाई के दौरान हुआ था हमला
यह घटना पिछले साल अगस्त महीने की है, जब सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जन सुनवाई का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान मुख्यमंत्री पर हमला किया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।
इस मामले में गुजरात के राजकोट निवासी दो लोगों—राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख—को आरोपी बनाया गया है। दोनों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।
आरोपियों की दलील, कोर्ट ने नहीं मानी
आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ तय किए गए आरोपों को चुनौती दी थी। उन्होंने यह भी मांग की थी कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रोका जाए। हालांकि, जस्टिस अनूप जयराम बम्बानी ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो कि ट्रायल को रोका जाना चाहिए।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक यह स्पष्ट न हो कि प्रक्रिया में कोई गंभीर खामी है या न्याय के साथ अन्याय हो रहा है, तब तक अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच से खुल सकते हैं राज
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच जल्द कराने की मांग की गई। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए कहा कि मोबाइल फोन इस मामले के कई अहम पहलुओं को सामने ला सकते हैं। खासकर इसलिए कि आरोपी दिल्ली के निवासी नहीं हैं, ऐसे में उनके संपर्क और गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। कोर्ट ने फॉरेंसिक साइंस लैब को निर्देश दिया है कि वह चार हफ्तों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करे।
25 अप्रैल से शुरू होगी गवाही
आरोपियों के वकील ने यह तर्क दिया कि यदि ट्रायल नहीं रोका गया, तो 25 अप्रैल से गवाहों के बयान दर्ज होने शुरू हो जाएंगे, जिससे उनके मुवक्किल को नुकसान हो सकता है। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि यह ट्रायल की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। अब इस मामले में 25 अप्रैल से गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे, जो केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 20 अगस्त को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद जांच के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दिसंबर में कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए। अब यह मामला पूरी तरह ट्रायल स्टेज में पहुंच चुका है और आगे की सुनवाई गवाहों और सबूतों के आधार पर होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत बिना किसी ठोस कारण के न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती। इस मामले में आरोपियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है और ट्रायल तय समय पर जारी रहेगा। आने वाले दिनों में गवाहों के बयान और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट इस केस में अहम भूमिका निभाएगी और इससे आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!