ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के डासना स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर में रविवार (8 फरवरी) को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों के विरोध में महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत का नेतृत्व जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, सामाजिक संगठनों के लोग और अलग-अलग वर्गों से जुड़े नागरिक मौजूद रहे। पंचायत में ओबीसी और एससी समाज के लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली, जो इस आयोजन की खास बात रही।
साधु-संतों ने जताया कड़ा विरोध
महापंचायत के दौरान साधु-संतों ने UGC के नए नियमों को लेकर नाराजगी जाहिर की। कई साधु-संतों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए फरसा और तलवारें लहराईं और इस एक्ट को समाज के लिए नुकसानदायक बताया। सभा के दौरान यति नरसिंहानंद सरस्वती ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार का नारा “एक रहोगे तो सुरक्षित रहोगे” है, लेकिन UGC के नए नियम हिंदू समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से देश में धार्मिक संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, इस मामले पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बीजेपी महिला पदाधिकारी का अनशन जारी
इस मुद्दे को लेकर मंदिर से जुड़ी भारतीय जनता पार्टी की एक महिला पदाधिकारी पिछले सात दिनों से आमरण अनशन पर बैठी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह नियम बच्चों के भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं और इसीलिए वह इसका विरोध कर रही हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो महिलाएं उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगी। उन्होंने रेल मार्ग बाधित करने और सड़क जाम करने की भी चेतावनी दी। हालांकि प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
ओबीसी और एससी समाज ने भी रखी अपनी बात
महापंचायत में शामिल हुए ओबीसी और एससी समाज के लोगों ने कहा कि समाज में आपसी भाईचारा बना हुआ है और वे मिलजुलकर रहते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने इस तरह के किसी एक्ट की मांग नहीं की थी, इसलिए उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यह नियम क्यों लाए गए हैं। कई लोगों ने आशंका जताई कि इससे समाज में अनावश्यक मतभेद पैदा हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा
UGC के नए नियमों को लेकर विवाद अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया था। साथ ही कोर्ट ने फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
आगे क्या होगा?
डासना मंदिर में हुई महापंचायत ने इस मुद्दे को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सरकार के अगले कदम पर ही इस पूरे मामले की दिशा तय होगी।
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