ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित Delhi Public School Ghaziabad (DPSG) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला स्कूल के समय को अचानक बढ़ाए जाने का है, जिसने अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। शनिवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने के बाद सोमवार को सैकड़ों अभिभावक जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इस दौरान ‘डीपीएसजी हाय-हाय’ और ‘डीएम साहब बाहर आओ’ जैसे नारे लगाए गए।
अभिभावकों का आरोप: नियमों की अनदेखी
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या परामर्श के बच्चों के स्कूल टाइम में बदलाव कर दिया। Indian Parents Association के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ ने आरोप लगाया कि यह फैसला शिक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि Central Board of Secondary Education (CBSE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी बड़े बदलाव से पहले अभिभावकों की राय लेना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।
नई शिक्षा नीति के खिलाफ बताया फैसला
अभिभावकों ने इस मुद्दे को National Education Policy 2020 (NEP 2020) से भी जोड़ा। उनका कहना है कि इस नीति का उद्देश्य बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करना है, लेकिन स्कूल ने समय बढ़ाकर उल्टा दबाव बढ़ा दिया है। इसके अलावा National Curriculum Framework 2023 के तहत तय समय सारणी के नियमों का भी पालन नहीं किया गया।
परिवहन व्यवस्था भी बनी विवाद की वजह
अभिभावकों ने स्कूल की परिवहन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि स्कूल में बसों की संख्या पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण बच्चों को लंबे समय तक स्कूल में रोका जा रहा है। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने इस फैसले का विरोध किया, तो स्कूल प्रशासन ने उन्हें साफ तौर पर कह दिया कि अगर समस्या है तो वे अपने बच्चों का दाखिला कहीं और करा सकते हैं।
बच्चों के स्वास्थ्य पर असर की चिंता
विवेक त्यागी ने कहा कि अचानक बढ़े स्कूल समय से बच्चों में थकान, तनाव और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्कूल अभिभावकों से मोटी फीस वसूलता है, तो उसे बेहतर सुविधाएं भी देनी चाहिए।
जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि बढ़ाया गया स्कूल टाइम तुरंत वापस लिया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि:
• सभी शिक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए
• स्कूल प्रबंधन को जवाबदेह बनाया जाए
• अभिभावकों की सहमति के बिना कोई बड़ा फैसला न लिया जाए
प्रशासन की भूमिका पर नजर
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उनका आंदोलन और तेज हो सकता है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या निजी स्कूलों में अभिभावकों की भागीदारी और बच्चों के हितों को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।
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