ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पुलिस ने एक ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप का खुलासा किया है, जिसके जरिए कथित रूप से युवाओं को देश विरोधी विचारों के लिए भड़काया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि इस ग्रुप में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े वीडियो और सामग्री साझा की जाती थी। पुलिस ने इस मामले में मौलाना, वकील और लॉ स्टूडेंट समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ग्रुप के जरिए कितने लोग जुड़े थे और क्या यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित था या इसके तार कहीं और भी जुड़े हुए हैं।
व्हाट्सएप चैट से खुला मामला
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के व्हाट्सएप ग्रुप में कुछ ऐसी चैट मिली, जिससे इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। इन चैट में कथित तौर पर समुदाय के साथ हो रहे अत्याचार, बाबरी मस्जिद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। आरोप है कि इन विषयों के जरिए युवाओं को भड़काने की कोशिश की जाती थी। पुलिस के अनुसार, ग्रुप में देश विरोधी संदेश और आतंकी संगठनों से जुड़े वीडियो भी साझा किए जाते थे।
पुलिस की छापेमारी में 6 आरोपी गिरफ्तार
यह कार्रवाई गाजियाबाद पुलिस की एक टीम ने की, जिसमें एडिशनल डीसीपी Lipi Nagachai और मसूरी थाना प्रभारी अजय चौधरी शामिल थे। 12 मार्च को पुलिस ने मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने सावेज, जुनैद, फरदीन, इकराम अली, फजरु और जावेद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, इन सभी आरोपियों का आपस में संपर्क था और वे अक्सर गांव की मस्जिद के बाहर बैठकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते थे।
ग्रुप का मुख्य संचालक सावेज
पुलिस जांच में सामने आया है कि नाहल गांव का रहने वाला सावेज इस व्हाट्सएप ग्रुप का मुख्य संचालक था। सावेज गांव में किराने की दुकान चलाता था। पुलिस के मुताबिक वह दुकान की आड़ में लोगों से संपर्क बनाता था और युवाओं को ग्रुप में जोड़ता था। वह यूट्यूब पर प्रतिबंधित संगठनों के वीडियो देखता था और उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करता था। इसके जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।
मौलाना जावेद की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस के अनुसार, गांव की मस्जिद में रहने वाले मौलाना जावेद भी इस गतिविधि में शामिल थे। जांच में पता चला कि शाम के समय नमाज से पहले कई लोग मस्जिद के बाहर इकट्ठा होते थे। इस दौरान बाबरी मस्जिद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाती थी। आरोप है कि इन चर्चाओं के दौरान युवाओं को उकसाने वाली बातें भी की जाती थीं।
सोशल मीडिया के जरिए फैलाया जा रहा था प्रचार
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई युवकों को जोड़ा गया था। इस ग्रुप में देश विरोधी संदेश साझा किए जाते थे और लोगों से कहा जाता था कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस ग्रुप से जोड़ें। सावेज ने पूछताछ में बताया कि ग्रुप में किसी का नंबर तभी जोड़ा जाता था जब उस व्यक्ति पर पूरा भरोसा हो जाता था।
मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच होगी
पुलिस को अभी तक सावेज का मोबाइल फोन मिला है। इसकी जांच में कई चैट और वीडियो सामने आए हैं। अब इस मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें से कौन-कौन से वीडियो, फोटो या चैट डिलीट किए गए हैं। जांच के बाद यह भी पता चल सकता है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
आरोपियों की पृष्ठभूमि
पुलिस ने जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग शामिल हैं। सावेज (20) किराने की दुकान चलाता था और ग्रुप का मुख्य संचालक माना जा रहा है। जुनैद (23) एलएलबी का छात्र है और सोशल मीडिया पर आतंकी संगठनों से जुड़े पोस्ट को लाइक करता था। फरदीन (22) मजदूरी करता है और लोगों को मस्जिद के बाहर बैठकों में बुलाने का काम करता था। इकराम अली (36) पेशे से वकील है और गाजियाबाद कचहरी में प्रैक्टिस करता था। फजरु (48) मजदूर है और बैठकों में शामिल रहता था। जबकि जावेद (45) गांव की मस्जिद में मौलाना रहा है और उस पर भी वीडियो और सामग्री साझा करने का आरोप है।
बांग्लादेश से जुड़े होने की भी जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी इकराम अली की मां मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। इस जानकारी के बाद पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस मामले के तार विदेश से तो नहीं जुड़े हुए हैं। हालांकि फिलहाल पुलिस ने इस बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और जांच जारी है।
युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक आरोपी युवाओं को यह कहकर प्रभावित करते थे कि समुदाय के साथ अन्याय हो रहा है। इसके बाद उन्हें प्रतिबंधित संगठनों के वीडियो दिखाए जाते थे और उनके विचारों से प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा सकती हैं, इसलिए ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि व्हाट्सएप ग्रुप में कुल कितने लोग जुड़े थे और क्या इस ग्रुप के जरिए किसी बड़े नेटवर्क से संपर्क किया जा रहा था। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपियों ने किसी अन्य शहर या राज्य में भी ऐसे नेटवर्क बनाए हैं या नहीं।
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