खाड़ी देशों में पानी क्यों है इतना महंगा? जानिए भारत की तुलना में बोतलबंद पानी की कीमत
खाड़ी देशों में पीने के पानी की कीमत भारत की तुलना में ज्यादा क्यों है? जानिए कुवैत, यूएई और सऊदी अरब में बोतलबंद पानी की कीमत और इसके पीछे डीसैलिनेशन प्रक्रिया की बड़ी वजह।
खाड़ी देशों में पानी क्यों है इतना महंगा? जानिए भारत की तुलना में बोतलबंद पानी की कीमत
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पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी संसाधनों में से एक है। इंसान की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर खेती और उद्योग तक, हर क्षेत्र में पानी की अहम भूमिका होती है। लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पानी की कीमत एक जैसी नहीं होती। खासकर खाड़ी देशों में पीने के पानी की कीमत भारत के मुकाबले काफी ज्यादा होती है। इसका मुख्य कारण वहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोतों की कमी और समुद्र के पानी को साफ करके पीने लायक बनाने की महंगी प्रक्रिया है। आइए जानते हैं कि खाड़ी देशों में पानी की कीमत भारत की तुलना में कितनी अलग है और इसके पीछे क्या वजहें हैं।

 

कुवैत में पानी की कीमत

खाड़ी देशों में बोतलबंद पानी की कीमतों के मामले में कुवैत अक्सर सबसे ऊपर रहता है। यहां पीने के पानी की एक स्टैंडर्ड 1.5 लीटर बोतल की कीमत करीब 0.14 कुवैती दिनार होती है। भारतीय मुद्रा में यह लगभग ₹38 से ₹40 के बराबर है। हालांकि अगर प्रीमियम या आयातित ब्रांड की बात करें तो कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है। कुछ हाई-एंड ब्रांड की बोतलें ₹125 प्रति लीटर तक भी पहुंच सकती हैं।

 

यूएई में बोतलबंद पानी का खर्च

यूएई में भी पानी की कीमतें अपेक्षाकृत ज्यादा हैं, खासकर बड़े शहरों जैसे दुबई में। यहां 1.5 लीटर की सामान्य पानी की बोतल आमतौर पर AED 2 से AED 3 के बीच मिलती है। भारतीय रुपये में इसकी कीमत करीब ₹45 से ₹68 होती है। अगर प्रीमियम ब्रांड खरीदा जाए तो कीमत और बढ़ जाती है और कुछ मामलों में ₹200 से ₹225 तक पहुंच सकती है।

 

सऊदी अरब में पानी की कीमत

सऊदी अरब में भी पानी की कीमत खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों जैसी ही है। यहां 1.5 लीटर की बोतल की औसत कीमत करीब SAR 2.28 होती है, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹50 के आसपास बैठती है। हालांकि स्थानीय ब्रांड अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। वहीं कुछ प्रीमियम बोतलबंद पानी की कीमत ₹300 से ₹400 तक पहुंच सकती है।

 

खाड़ी देशों में पानी महंगा क्यों है

खाड़ी देशों में पानी की ज्यादा कीमत का सबसे बड़ा कारण डीसैलिनेशन प्रक्रिया है। इन देशों में नदियां, झीलें और मीठे पानी के प्राकृतिक स्रोत बहुत कम हैं। इसलिए यहां के लोग समुद्र के पानी को साफ करके पीने लायक बनाते हैं। इस प्रक्रिया को Desalination कहा जाता है। इसमें समुद्री पानी से नमक और अन्य अशुद्धियों को हटाकर उसे पीने योग्य बनाया जाता है।

 

लेकिन यह तकनीक काफी महंगी होती है और इसमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा और आधुनिक मशीनों की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते पानी की कीमत बढ़ जाती है।

 

कुछ जगह पेट्रोल से भी महंगा पानी

खाड़ी क्षेत्र में कई बार ऐसी स्थिति भी देखने को मिलती है जहां बोतलबंद पानी की कीमत पेट्रोल से भी ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कई देशों में सरकार ईंधन पर सब्सिडी देती है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम रहती हैं। दूसरी ओर डीसैलिनेशन प्लांट्स को चलाने और उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत होती है। इसका असर पानी की कीमतों पर पड़ता है।

 

भारत में पानी अपेक्षाकृत सस्ता

अगर इंडिया की बात करें तो यहां पानी खाड़ी देशों की तुलना में काफी सस्ता है। भारत में एक लीटर बोतलबंद पानी की कीमत आमतौर पर ₹20 के आसपास होती है। इसके अलावा कई जगहों पर नल का पानी मुफ्त या बहुत कम कीमत पर उपलब्ध होता है। भारत में नदियां, झीलें और भूजल जैसे प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। यही वजह है कि यहां पानी की सप्लाई की लागत खाड़ी देशों की तुलना में कम रहती है।

 

भविष्य में बढ़ सकती है पानी की अहमियत

दुनिया के कई हिस्सों में पानी की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और पानी के बढ़ते उपयोग के कारण आने वाले समय में यह चुनौती और बड़ी हो सकती है। खाड़ी देशों ने इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक का सहारा लिया है, लेकिन इसकी लागत काफी ज्यादा है।

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