ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद के सिहानीगेट इलाके में एक दुखद हादसा हुआ, जिसने रात के समय सड़क सुरक्षा और छोटे-से “डिसबैलेंस” के खतरे को फिर सामने रख दिया। पटेल नगर स्थित रॉयल ग्रीन होटल के सामने देर रात एक 48 साल के दुकानदार की नाले में गिरकर मौत हो गई। सूचना पुलिस को रात 11:54 बजे मिली। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि एक स्कूटी सड़क किनारे गिरी थी और उसकी लाइट जल रही थी। कुछ ही दूरी पर नाले में एक व्यक्ति अचेत हालत में पड़ा मिला।
कैसे मिला व्यक्ति, किसने दी सूचना
घटना की जानकारी देने वाले व्यक्ति ने बताया कि उसे सड़क किनारे स्कूटी संदिग्ध हालत में दिखी। पास जाकर देखा तो नाले में एक आदमी पड़ा था। राहगीरों की मदद से उसे बाहर निकाला गया और तुरंत एमएमजी अस्पताल भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। यह वही पल होता है जब परिवार को खबर मिलती है और एक सामान्य रात अचानक जिंदगी की सबसे भारी रात बन जाती है।
मृतक की पहचान और रोज का रूटीन
स्कूटी के नंबर से पहचान हुई कि मृतक शंकर लाल गर्ग थे, जो डासना गेट इलाके के रहने वाले थे। परिजनों ने बताया कि वह रोज रात में दुकान बंद करने के बाद कूड़ा फेंकने जाते थे और केसरी माता मंदिर में पूजा कर घर लौटते थे। घटना वाली रात भी वह उसी क्रम में निकले थे। यानी यह कोई असामान्य यात्रा नहीं थी—बस रोज की तरह घर लौटना था।
टक्कर हुई या खुद गिरा?
सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि कहीं किसी वाहन ने टक्कर तो नहीं मारी। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे चेक किए, लेकिन किसी दूसरे वाहन की टक्कर का स्पष्ट सबूत नहीं मिला। स्कूटी के निरीक्षण में भी टक्कर के निशान नहीं पाए गए। शुरुआती अंदाजा यह लगाया गया कि स्कूटी पर रखी एक प्लास्टिक की बाल्टी के कारण वाहन असंतुलित हुआ और स्कूटी नाले की तरफ मुड़ गई।
शहरों में नाले: एक नजरअंदाज खतरा
ऐसे हादसों में कई बार असली खतरा सड़क किनारे खुले/कम सुरक्षित नाले होते हैं। रात में रोशनी कम हो, सड़क किनारे जगह तंग हो और थोड़ा सा भी संतुलन बिगड़े—तो गिरने का जोखिम बढ़ जाता है। इस घटना ने यह सवाल भी छोड़ा है कि क्या ऐसे जगहों पर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव मार्किंग और बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग पर्याप्त है?
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और जांच जारी है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक “केस” नहीं, एक खालीपन है जिसे भर पाना मुश्किल है। उम्मीद यही है कि जांच से सच्चाई साफ हो और अगर सुरक्षा में कमी हो, तो उसे ठीक किया जाए ताकि फिर कोई और घर इस तरह न उजड़े।
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