ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
टी20 में जीत का सबसे बड़ा नियम है—अगर आपकी गेंदबाजी दबाव नहीं बना रही, तो मैच हाथ से निकलते देर नहीं लगती। भारत की साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद यही बहस तेज हो गई। इस हार के बाद पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भारत की गेंदबाजी पर सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की गेंदबाजी “एक्सपोज़” हो गई है और बड़े बल्लेबाजी क्रम के सामने प्लान साफ नजर नहीं आया।
“कुलदीप यादव मिसिंग लिंक हैं”
अख्तर की सबसे बड़ी बात कुलदीप यादव को लेकर रही। उन्होंने कुलदीप को “मिसिंग लिंक” बताते हुए कहा कि कुलदीप ऐसे स्पिनर हैं जो हवा में गेंद को धोखा दे सकते हैं और जरूरत के समय विकेट निकाल सकते हैं। टी20 में विकेट निकालना ही मैच का टर्निंग पॉइंट होता है। अगर बीच के ओवरों में विकेट नहीं मिलें, तो बल्लेबाज सेट होकर डेथ ओवरों में मैच पलट देते हैं। अख्तर का इशारा इसी तरफ था कि भारत को एक ऐसे स्पिनर की जरूरत थी जो बीच में ब्रेक लगा सके।
हार्दिक और दुबे की गेंदबाजी पर सवाल
अख्तर ने हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे की गेंदबाजी को लेकर भी तीखी बात की। उनका कहना था कि जब गेंद की रफ्तार 120 के आसपास हो और सामने साउथ अफ्रीका जैसी ताकतवर बैटिंग हो, तो सिर्फ “वेरिएशन” के भरोसे बचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने एक तुलना भी की कि ये कोई ऐसे तेज गेंदबाज नहीं हैं जिनकी स्पीड से बल्लेबाज डर जाए। ऐसे में डेथ ओवर्स में उन्हें लगाना जोखिम बन जाता है।
वरुण और सुंदर वाले कॉम्बिनेशन पर टिप्पणी
अख्तर ने यह भी कहा कि अगर आपके पास एक जैसे स्किल-सेट वाले गेंदबाज हों, तो टीम की गेंदबाजी थोड़ी “पढ़ने लायक” हो जाती है। खासकर बड़े मैचों में विपक्ष टीम जल्दी समझ जाती है कि किस ओवर में क्या होने वाला है। टी20 में यही छोटी-छोटी चीजें बड़ा फर्क बना देती हैं—कौन सा बॉलर कब आएगा, किस मैचअप में आएगा, और किस फेज में विकेट निकाल पाएगा।
टीम इंडिया के लिए असली चुनौती
भारत के लिए अब चुनौती यह नहीं कि आलोचना हो रही है। असली चुनौती यह है कि आगे के मैचों में टीम अपनी बॉलिंग को कैसे “रीसेट” करती है। स्पिन और पेस का सही बैलेंस, डेथ ओवर्स में स्पष्ट रणनीति और बीच में विकेट लेने की आदत—ये तीन चीजें जरूरी हैं। अगर विकेट नहीं मिलेंगे, तो टी20 में किसी भी दिन कोई भी टीम 15–20 गेंदों में मैच छीन लेती है।
फैंस क्या उम्मीद करें?
फैंस यही चाहेंगे कि टीम अपने कॉम्बिनेशन पर साहसिक फैसला ले। कुलदीप जैसे विकल्प अगर उपलब्ध हैं तो उन्हें मौके मिलें, ताकि बीच के ओवरों में विकेट का दबाव बने। बड़े टूर्नामेंट में एक मैच हारने से कहानी खत्म नहीं होती, लेकिन उससे सीखना जरूरी होता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!