ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
सुपर-8 मुकाबले में भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम और दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के बीच हुए मैच में युवा बल्लेबाज डेवाल्ड ब्रेविस ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ऐसा नो-लुक शॉट लगाया कि गेंद 82 मीटर दूर जाकर बाउंड्री पार कर गई। यह शॉट खास इसलिए भी रहा क्योंकि उन्होंने दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती के खिलाफ यह कारनामा किया।
दमदार पारी, बड़ा स्कोर
दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 187 रन बनाए। उनकी पारी के नौवें ओवर में यह रोमांचक पल आया। वरुण चक्रवर्ती अपने दूसरे स्पेल का ओवर फेंकने आए। पहली चार गेंदों पर बल्लेबाजों ने 11 रन बना लिए थे, जिससे दबाव गेंदबाज पर था।
पांचवीं गेंद पर डेवाल्ड ब्रेविस ने सामने की ओर जोरदार शॉट खेला, लेकिन खास बात यह रही कि उन्होंने शॉट के बाद गेंद को देखा ही नहीं। यह नो-लुक शॉट था, जिसमें बल्लेबाज आत्मविश्वास दिखाते हुए गेंद को देखने की बजाय शॉट पर भरोसा करता है।
क्या होता है नो-लुक शॉट?
नो-लुक शॉट क्रिकेट में बल्लेबाज के आत्मविश्वास और शैली का प्रतीक माना जाता है। जब बल्लेबाज गेंद को सही तरह से मिडिल करता है और जोरदार शॉट खेलता है, तो वह शॉट के बाद गेंद की दिशा नहीं देखता। इसका मतलब होता है कि उसे भरोसा है कि गेंद बाउंड्री पार जा रही है।
डेवाल्ड ब्रेविस ने भी यही किया। उन्होंने गेंद को जोर से मारा और अपना सिर नीचे रखा, क्योंकि उन्हें पता था कि शॉट सफल हो चुका है। गेंद बिजली की गति से बल्ले से निकली और सीधे बाउंड्री के पार जाकर गिरी।
वरुण चक्रवर्ती पर पड़ा असर
इस ओवर में वरुण चक्रवर्ती को 17 रन पड़े। हालांकि वह अनुभवी स्पिनर हैं और कई बार मैच में वापसी कर चुके हैं, लेकिन इस शॉट ने ब्रेविस की आक्रामक मानसिकता को दिखाया।
वरुण चक्रवर्ती को दुनिया के बेहतरीन स्पिनरों में गिना जाता है, लेकिन क्रिकेट में ऐसे शॉट्स खेलना बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को दर्शाता है। यह मुकाबला रोमांचक बना रहा और दर्शकों ने शानदार क्रिकेट का आनंद लिया।
नो-लुक शॉट का इतिहास
नो-लुक शॉट क्रिकेट में नया नहीं है। वेस्टइंडीज के आंद्रे फ्लेचर अक्सर इस शैली में शॉट खेलते नजर आए हैं। भारतीय क्रिकेट में भी यह शैली चर्चा में रही है, खासकर जब एमएस धोनी ने 2009 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐसा शॉट खेला था।
अफगानिस्तान के राशिद खान और पाकिस्तान के खिलाड़ी सैम अयूब भी नो-लुक शॉट को लोकप्रिय बना रहे हैं। यह शॉट अब आधुनिक क्रिकेट का हिस्सा बन चुका है, जहां बल्लेबाज अपनी शैली और आत्मविश्वास दिखाते हैं।
मैच का रोमांच जारी
सुपर-8 मुकाबला दर्शकों के लिए यादगार रहा। दक्षिण अफ्रीका की पारी में कई बड़े शॉट देखने को मिले, लेकिन डेवाल्ड ब्रेविस का नो-लुक शॉट सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
भारतीय टीम के गेंदबाजों ने भी संघर्ष किया, लेकिन क्रिकेट में ऐसे पल ही खेल को रोमांचक बनाते हैं। अब फैंस अगली भिड़ंत का इंतजार कर रहे हैं, जहां दोनों टीमें फिर से अपनी ताकत दिखाएंगी।
यह मुकाबला साबित करता है कि क्रिकेट में आत्मविश्वास और तकनीक का महत्व कितना बड़ा है। डेवाल्ड ब्रेविस जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य के सितारे बन सकते हैं, जो खेल को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!