ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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श्रीलंका क्रिकेट एक बार फिर प्रशासनिक संकट में फंस गया है। बोर्ड के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा और कार्यकारिणी के सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सरकार ने बोर्ड के कामकाज में हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए।
रिपोर्टों के मुताबिक यह फैसला बढ़ते जनदबाव और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच सामने आया।
बताया
गया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके के साथ चर्चा के बाद नेतृत्व
परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई।
यानी यह सिर्फ बोर्ड के भीतर का बदलाव नहीं, बल्कि
देश के शीर्ष स्तर पर लिए गए हस्तक्षेपकारी फैसले का असर भी है।
इस्तीफों के पीछे क्या वजह बताई जा रही है
श्रीलंका
क्रिकेट लंबे समय से भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और पारदर्शिता की कमी जैसे आरोपों से घिरा रहा है।
हालांकि बोर्ड की कमाई और आर्थिक ताकत काफी बड़ी मानी जाती है,
लेकिन उसी अनुपात में उस पर सवाल भी उठते रहे हैं।
रिपोर्टों
में कहा गया कि शम्मी सिल्वा 2019 से इस पद पर थे और लगातार कई कार्यकाल तक प्रभाव बनाए रहे।
लेकिन ताजा घटनाक्रम ने दिखा दिया कि सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव जब
एक साथ बढ़ते हैं, तो क्रिकेट बोर्ड जैसी संस्था भी अचानक
बदल सकती है।
आगे सबसे बड़ा सवाल क्या है
अब सबसे
अहम मुद्दा यह है कि श्रीलंका क्रिकेट की नई व्यवस्था कैसी होगी। सरकार अंतरिम
पैनल या अस्थायी प्रबंधन के जरिए सुधार लागू करना चाहती है।
लेकिन यहां एक दूसरा जोखिम भी है, क्योंकि
क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल को लेकर ICC पहले भी संवेदनशील
रुख रखता रहा है।
इसलिए
श्रीलंका के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे घरेलू स्तर पर पारदर्शिता और
विश्वास बहाल करना है, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट निकायों के नियमों का भी ध्यान रखना है।
अगर संतुलन बिगड़ा, तो बोर्ड सुधार की कोशिश
के साथ-साथ बाहरी विवाद में भी उलझ सकता है।
ताज़ा अपडेट
28 से
30 अप्रैल 2026 तक की रिपोर्टों में यह
साफ हुआ कि इस्तीफे औपचारिक रूप से हो चुके हैं और अंतरिम ढांचे की तैयारी जारी
है।
अब क्रिकेट जगत की नजर इस पर है कि यह बदलाव वास्तविक सुधार लाता है
या सिर्फ चेहरों की अदला-बदली बनकर रह जाता है।
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