ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर चल रहे विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि फिल्म के नाम में ऐसा कोई शब्द नहीं है, जिससे यादव समाज की छवि खराब होती हो।
यह याचिका विश्व यादव परिषद की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि फिल्म का नाम और कहानी यादव समाज को गलत तरीके से पेश करती है। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
कोर्ट ने पूछा- क्या शादी से टूटता है सामाजिक ताना-बाना?
मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान बेंच ने एक अहम सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “क्या किसी हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी सामाजिक ताना-बाना तोड़ती है?”
कोर्ट की इस टिप्पणी ने साफ संकेत दिया कि केवल अंतरधार्मिक प्रेम कहानी दिखाने भर से समाज की छवि खराब होने का दावा ठोस आधार पर नहीं टिका है। अदालत ने यह भी कहा कि हाल में आई फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के मामले से यह मामला अलग है। वहां ‘घूसखोर’ शब्द का सीधा नकारात्मक अर्थ था, जबकि ‘यादव जी की लव स्टोरी’ नाम में ऐसा कोई अपमानजनक संकेत नहीं है।
“जरा सहनशील बनिए” – कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फिल्म खुद को सच्ची कहानी पर आधारित बताती है, जिससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। इस पर कोर्ट ने जवाब दिया कि पहले भी ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्मों को लेकर ऐसे विवाद हुए थे, लेकिन तब भी बैन लगाने से इनकार किया गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा, “जरा सहनशील बनिए। यह फिक्शन है। एक हफ्ते में सब खत्म हो जाएगा। आजकल लोग थिएटर से ज्यादा मोबाइल पर फिल्में देखते हैं।” इस टिप्पणी से अदालत का रुख साफ था कि रचनात्मक अभिव्यक्ति पर बिना ठोस कारण के रोक नहीं लगाई जा सकती।
फिल्म 27 फरवरी को होगी रिलीज
फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ 27 फरवरी को रिलीज होने जा रही है। इसमें प्रगति तिवारी मुख्य भूमिका में हैं, जो ‘सिंपल यादव’ का किरदार निभा रही हैं। वहीं विशाल मोहन ‘वसीम अख्तर’ की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अंकित भड़ाना ने किया है और इसे संदीप तोमर ने प्रोड्यूस किया है।
फिल्म की कहानी एक यादव समाज की हिंदू लड़की और एक मुस्लिम युवक की प्रेम कहानी पर आधारित बताई जा रही है। इसी कहानी को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है।
कई राज्यों में हो रहा विरोध
उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यादव समाज के कुछ संगठनों का कहना है कि फिल्म की कहानी और नाम से उनकी भावनाएं आहत हो रही हैं। उनका आरोप है कि फिल्म खास तौर पर यादव समाज को निशाना बनाती है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस तरह की कहानी समाज की संस्कृति और आस्था के खिलाफ है।
अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सामाजिक भावनाएं
यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि जब तक किसी फिल्म में स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री न हो, तब तक उसे रोकना सही नहीं माना जाएगा।
अब फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होगी और इसके बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि विवाद कितना असर डालता है। फिलहाल अदालत के फैसले ने फिल्म की राह साफ कर दी है।
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