ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भारत सरकार से एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है। यह एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। मंगलवार को एयरपोर्ट के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें यह लाइसेंस सौंपा। इसके बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने दी परियोजना की जानकारी
एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमान के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट परियोजना की प्रगति और आने वाले चरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब बाकी नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया जारी है।
सुरक्षा मंजूरी का इंतजार
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम फिलहाल नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के पास समीक्षा के लिए लंबित है। जैसे ही यह सुरक्षा मंजूरी मिल जाएगी, एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तारीख तय करेगा।
NCR और पश्चिमी यूपी को मिलेगा बड़ा फायदा
जेवर में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों को देश और दुनिया के कई प्रमुख शहरों से बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी। यह एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, जिसे विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है।
चार चरणों में होगा एयरपोर्ट का विकास
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक आधुनिक यात्री टर्मिनल बनाया गया है, जिसकी क्षमता हर साल लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों को संभालने की होगी। दूसरे चरण में इस क्षमता को बढ़ाकर करीब 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाया जाएगा। वहीं तीसरे और चौथे चरण के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट की कुल क्षमता लगभग 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
एयरपोर्ट के पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्ग मीटर रखा गया है। इसमें 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर हर घंटे करीब 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है।
कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी होगा तैयार
एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी बनाया जा रहा है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रति वर्ष होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 15 लाख टन तक करने की योजना है।
अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण पर फोकस
यह एयरपोर्ट तकनीकी रूप से भी काफी आधुनिक होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं लागू की जा रही हैं। साथ ही इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। एयरपोर्ट परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
क्षेत्र के विकास को मिलेगी रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात का दबाव कम होगा। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
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