नोएडा में कमर्शियल प्लॉट के नाम पर 1.59 करोड़ की ठगी, दो सगे भाइयों पर आरोप—एक गिरफ्तार, दूसरा फरार
नोएडा के सेक्टर-142 थाना क्षेत्र में कमर्शियल प्लॉट दिलाने का झांसा देकर 1.59 करोड़ रुपये की ठगी का मामला खुला है। आरोप है कि दो सगे भाइयों ने फर्जी अलॉटमेंट लेटर और नकली एग्रीमेंट दिखाकर किस्तों में रकम ली, फिर न प्लॉट मिला न रजिस्ट्री हुई। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, दूसरे की तलाश जारी है।
नोएडा में कमर्शियल प्लॉट के नाम पर 1.59 करोड़ की ठगी, दो सगे भाइयों पर आरोप—एक गिरफ्तार, दूसरा फरार
  • Category: नोएडा-ग्रेनो

नोएडा में प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार मामला रकम और तरीके—दोनों वजहों से चर्चा में है। सेक्टर-142 थाना क्षेत्र में कमर्शियल प्लॉट दिलाने के नाम पर 1.59 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। आरोप है कि दो सगे भाइयों ने खुद को प्लॉट का मालिक बताकर फर्जी दस्तावेज दिखाए और फिर किस्तों में बड़ी रकम वसूल ली। जब काफी समय तक न प्लॉट मिला और न रजिस्ट्री हुई, तब पीड़ित को शक हुआ और उसने पुलिस से शिकायत कर दी।

इस केस में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं दूसरा भाई अब भी फरार है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस को शक है कि यह गैंग सिर्फ एक व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि दूसरे लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी कर चुका हो सकता है। इसलिए अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को भरोसा दिलाया गया कि उसे नोएडा में कमर्शियल प्लॉट दिला दिया जाएगा। कमर्शियल प्लॉट का नाम सुनते ही कई लोग जल्दी भरोसा कर लेते हैं, क्योंकि नोएडा में ऐसी जगहों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और निवेश का लालच भी होता है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने खुद को “मालिक” बताकर कुछ कागज दिखाए और धीरे-धीरे करके किस्तों में 1.59 करोड़ रुपये ले लिए।

जब पीड़ित को लंबे समय तक प्लॉट नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई, तब उसे समझ आया कि उसके साथ कुछ गड़बड़ हुई है। आम तौर पर प्रॉपर्टी डील में सबसे जरूरी चीज होती है—दस्तावेजों की सही जांच और समय पर रजिस्ट्री। लेकिन यहां मामला उल्टा था: कागज दिखाए गए, पैसे ले लिए गए, और फिर बात टालमटोल में फंसती चली गई।

फर्जी अलॉटमेंट लेटर और नकली एग्रीमेंट का खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी का तरीका बेहद “कागजी” था। आरोपियों ने पीड़ित को फर्जी अलॉटमेंट लेटर और नकली एग्रीमेंट दिखाकर भरोसे में लिया। कागज देखकर अक्सर लोगों को लगता है कि डील पक्की है, लेकिन असली बात यह है कि अलॉटमेंट लेटर, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, प्राधिकरण की पुष्टि और जमीन/प्लॉट का वास्तविक मालिक—इन सबकी जांच जरूरी होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों ने जमीन की कीमत बताकर पूरा भुगतान करा लिया, लेकिन बाद में न तो जमीन दिखाई गई और न ही रजिस्ट्री कराई गई। यानी पीड़ित को सिर्फ वादे मिले, कब्जा या कानूनी कागज नहीं।

आरोपी कौन हैं और कहां रहते हैं?

पुलिस जांच में जो नाम सामने आए हैं, उनके मुताबिक आरोपी देवांश गौतम और विष्णु गौतम हैं और दोनों सगे भाई बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार दोनों ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक सोसायटी में रहते हैं और मिलकर प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने का काम करते थे। यही वजह है कि लोगों को उन पर भरोसा करना आसान हो गया, क्योंकि वे खुद को “प्रॉपर्टी के काम का जानकार” दिखाते थे।

ऐसे मामलों में अक्सर आरोपी पहले अपना नेटवर्क और पहचान मजबूत करते हैं, फिर भरोसे का फायदा उठाकर बड़ी रकम ऐंठते हैं। यहां भी यही पैटर्न दिखता है—कागज, बातचीत, भरोसा और किस्तों में पैसे।

पैसे मांगे तो धमकी देने लगे

रिपोर्ट के मुताबिक जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। पहले टालमटोल हुई, फिर दबाव बनाया गया। अक्सर ठगी के मामलों में यही होता है—जब पीड़ित रकम मांगता है, तो उसे डराने की कोशिश की जाती है ताकि वह पुलिस तक न जाए। लेकिन इस केस में पीड़ित ने लगातार धमकी और टालमटोल के बाद पुलिस का रुख किया और शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद सेक्टर-142 थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। जब पुलिस ने कागजात और लेन-देन की जांच की, तो मामला ठगी की तरफ साफ जाता दिखा।

एक गिरफ्तार, दूसरा फरार

इस केस में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देवांश गौतम को गिरफ्तार कर लिया। एडीसीपी संतोष कुमार के हवाले से बताया गया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया और फिर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

वहीं दूसरा आरोपी विष्णु गौतम अभी फरार है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। जब किसी केस में एक आरोपी पकड़ा जाता है और दूसरा फरार होता है, तो पुलिस आमतौर पर फोन लोकेशन, रिश्तेदारों के ठिकाने और संभावित छिपने की जगहों पर नजर रखती है। इस मामले में भी जांच उसी दिशा में बढ़ती दिख रही है।

क्या और लोग भी ठगे गए?

पुलिस को आशंका है कि आरोपी भाइयों ने इसी तरह और लोगों को भी शिकार बनाया हो सकता है। इसलिए जांच अब सिर्फ एक पीड़ित तक सीमित नहीं रखी जा रही। अगर ऐसे और पीड़ित सामने आते हैं, तो केस में धाराएं बढ़ सकती हैं और ठगी का पूरा नेटवर्क भी सामने आ सकता है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी डीलिंग का बड़ा बाजार है, जहां असली दलाल और नकली दलाल—दोनों तरह के लोग घूमते हैं। इसी वजह से पुलिस भी ऐसे मामलों में आम तौर पर यह देखती है कि कहीं आरोपियों ने एक ही तरीका अपनाकर कई लोगों से पैसे तो नहीं ऐंठे।

प्रॉपर्टी डील करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

यह केस आम लोगों के लिए एक सबक भी है। प्रॉपर्टी का सौदा करते समय कुछ बेसिक बातें बहुत जरूरी हैं:

·        सिर्फ “अलॉटमेंट लेटर” देखकर पूरी रकम न दें; प्राधिकरण/रिकॉर्ड से पुष्टि करें।

·        एग्रीमेंट और दस्तावेज किसी भरोसेमंद वकील/जानकार से चेक कराएं।

·        रजिस्ट्री, मालिकाना हक और साइट विजिट—इन तीनों के बिना भुगतान से बचें।

·        अगर बार-बार टालमटोल हो रही है, तो समय रहते शिकायत करें।

अब आगे क्या?

अब इस केस में अगला बड़ा कदम फरार आरोपी की गिरफ्तारी है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसी तरह की और ठगी तो नहीं हुई। अगर नए पीड़ित सामने आते हैं, तो मामला और बड़ा हो सकता है।

नोएडा पुलिस की यह कार्रवाई एक संदेश भी देती है कि प्रॉपर्टी फ्रॉड के मामलों में शिकायत करने पर जांच और गिरफ्तारी संभव है। लेकिन असली जरूरत यह है कि लोग भी सतर्क रहें, क्योंकि एक गलत भरोसा और बिना जांच के किया गया भुगतान भारी नुकसान में बदल सकता है।

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