ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश में कफ सिरप सिंडिकेट के मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इस मुद्दे पर सत्ताधारी भाजपा और समाजवादी पार्टी आमने-सामने हैं। सोमवार को योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कफ सिरप मामले के एक आरोपी की तस्वीर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ दिखाते हुए सवाल उठाए, जिसके बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया। इसी के साथ यह मामला राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप का नया केंद्र बन गया है।
अखिलेश यादव का पलटवार
मुख्यमंत्री के हमले के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से पलटवार किया। उन्होंने एक तस्वीर साझा की, जिसमें कफ सिरप केस के आरोपी अमित सिंह टाटा को जन्मदिन पर केक खिलाते हुए पूर्व जौनपुर सांसद धनंजय सिंह नजर आ रहे हैं। पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि आखिर आरोपी किन-किन राजनीतिक नेताओं के संपर्क में रहे हैं। उनका इशारा था कि सिर्फ विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष के नेताओं से भी आरोपी जुड़े रहे हैं।
सपा ने साझा कीं नई तस्वीरें
मामले को और तेज़ करते हुए समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल ने चार नई तस्वीरें जारी की हैं। सपा का दावा है कि इन तस्वीरों में कफ सिरप सिंडिकेट से जुड़े आरोपी भाजपा के चार विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) के साथ दिखाई दे रहे हैं। सपा का आरोप है कि सरकार चुनिंदा तौर पर विपक्ष को निशाना बना रही है, जबकि आरोपी सत्ताधारी दल के नेताओं के संपर्क में भी रहे हैं और कई सार्वजनिक व निजी कार्यक्रमों में साथ नजर आए हैं। पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
भाजपा की चुप्पी और पुराना रुख
दूसरी ओर, भाजपा की तरफ से अब तक सपा द्वारा साझा की गई नई तस्वीरों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी पहले ही यह कह चुकी है कि कानून अपना काम करेगा और दोषी चाहे किसी भी दल से हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा का रुख है कि मामले की जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कर रही हैं और सरकार किसी भी अपराधी का पक्ष नहीं लेगी।
जांच जारी, बयानबाजी तेज
कफ सिरप सिंडिकेट के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई अभी जारी है। इस बीच नेताओं के बीच शब्दों की जंग और तीखी होती जा रही है। तस्वीरों के आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच का परिणाम क्या आता है और किसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है।
राजनीति और कानून आमने-सामने
इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि बड़े आपराधिक मामलों में राजनीति गहराई तक जुड़ जाती है। एक ओर विपक्ष सत्ता पक्ष पर आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार सख्त कानून व्यवस्था का भरोसा दिला रही है। अब देखना यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई हो पाती है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!