ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में बीजेपी अपनी पहली सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। चर्चा है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को हो सकता है, जो रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती भी है। यह दिन बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के लिए बेहद खास माना जाता है।
सीएम पद की रेस में शुभेंदु अधिकारी आगे
बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार शुभेंदु अधिकारी को माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने पहले नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राजनीतिक हलचल पैदा की थी। इसके बाद उन्होंने पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और राज्य में बीजेपी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। वे लंबे समय तक टीएमसी का हिस्सा रहे हैं और राज्य की राजनीति को गहराई से समझते हैं। यही वजह है कि उन्हें एक मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक विकल्प माना जा रहा है।
संघ बैकग्राउंड वाले नेताओं पर भी नजर
हालांकि शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे हैं, लेकिन बीजेपी के अंदर संघ (RSS) बैकग्राउंड वाले नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष साभिक भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष को भी संभावित विकल्प माना जा रहा है। दिलीप घोष ने राज्य में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है, जबकि साभिक भट्टाचार्य को बूथ स्तर के संगठन में विशेषज्ञ माना जाता है। दोनों नेता लंबे समय से संघ से जुड़े हुए हैं।
बीजेपी की रणनीति: विकास और उद्योग पर फोकस
बीजेपी ने चुनाव के दौरान टीएमसी सरकार पर रोजगार और उद्योग के मुद्दों को लेकर तीखा हमला किया था। पार्टी का कहना था कि राज्य में विकास की गति धीमी है और युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। इसी वजह से बीजेपी चाहती है कि नया मुख्यमंत्री ऐसा हो जो इंडस्ट्री फ्रेंडली नीतियों पर काम कर सके और राज्य में निवेश को बढ़ावा दे।
क्या होगा “बड़ा चेहरा बनाम संगठन चेहरा” मॉडल?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या बीजेपी मध्य प्रदेश या राजस्थान की तरह किसी कम चर्चित चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकती है या फिर बंगाल जैसे बड़े राज्य में एक मजबूत और लोकप्रिय चेहरे को ही चुना जाएगा। पार्टी ने पहले भी अलग-अलग राज्यों में अलग रणनीति अपनाई है। ओडिशा में पहली बार सरकार बनने पर मोहन चरण माझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जो लंबे समय से संघ से जुड़े हुए थे।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की संभावित सरकार राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। टैगोर जयंती पर शपथ ग्रहण होने की चर्चा इसे और भी प्रतीकात्मक बना देती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी शुभेंदु अधिकारी जैसे बड़े चेहरे पर भरोसा करती है या संघ बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे लाती है
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