ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई को क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई और आखिरकार इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
डॉक्टर कपल निकले मास्टरमाइंड
जांच के दौरान सामने आया कि केशवपुरम स्थित एक निजी अस्पताल का संचालन करने वाला डॉक्टर कपल इस पूरे रैकेट का मुख्य आरोपी है। आरोप है कि यह कपल गरीब लोगों को लालच देकर 8 से 10 लाख रुपये में डोनर तैयार करता था और फिर मरीजों से 80 लाख रुपये तक लेकर अवैध ट्रांसप्लांट करवाता था।
लाखों का खेल, कई राज्यों से जुड़े तार
इस रैकेट में दिल्ली और लखनऊ से डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी, जो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को अंजाम देती थी। ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर को कल्याणपुर के अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था, ताकि मामले को छुपाया जा सके। पुलिस के अनुसार, एक मामले में डोनर को करीब 9.5 लाख रुपये दिए गए, जबकि रिसीवर से 80 लाख रुपये वसूले गए।
छापेमारी में कई गिरफ्तार
सोमवार देर शाम पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान डॉक्टर कपल और एक ब्रोकर को हिरासत में लिया गया है। साथ ही डोनर और रिसीवर को भी पुलिस सुरक्षा में रखा गया है और उनका इलाज जारी है।
जांच में जुटी एजेंसियां
एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी के अनुसार, सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर जांच शुरू की। फिलहाल तीनों अस्पतालों में गहन जांच जारी है और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
कानून और मानवता के खिलाफ अपराध
यह मामला न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी गंभीर अपराध है। गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनके अंगों का सौदा करना एक खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
कानपुर में सामने आया यह मामला अवैध अंग व्यापार के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से इस रैकेट का खुलासा जरूर हुआ है, लेकिन इस तरह के मामलों पर सख्त निगरानी और कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।
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