ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने नोएडा की दादरी विधानसभा में रैली कर अपने चुनावी अभियान का आगाज कर दिया है। करीब 55 मिनट के इस भाषण में उन्होंने साफ संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी अब पूरी ताकत के साथ 2027 के चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इस रैली को ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ नाम दिया गया, जिसका मकसद वेस्ट यूपी में हिंदू-मुस्लिम वोटरों के बीच की दूरी को कम करना था।
किसानों को साधने की कोशिश
अखिलेश यादव के भाषण का सबसे बड़ा फोकस किसानों पर रहा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो जमीन अधिग्रहण के समय किसानों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाएगा।
वेस्ट यूपी को किसान बेल्ट माना जाता है, जहां बड़ी आबादी खेती से जुड़ी है। ऐसे में यह मुद्दा बेहद अहम है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार किसानों की जमीन सस्ते दामों पर खरीद रही है और उन्हें सही कीमत नहीं मिल रही। इस ऐलान के जरिए उन्होंने वेस्ट यूपी के करीब 3 करोड़ किसानों को साधने की कोशिश की।
महिलाओं और युवाओं पर भी जोर
अखिलेश यादव ने महिलाओं और युवाओं को भी अपने भाषण का केंद्र बनाया। उन्होंने वादा किया कि उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े निवेश (MOU) तो हो रहे हैं, लेकिन उसके हिसाब से नौकरियां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
वोट बैंक की नई रणनीति
समाजवादी पार्टी की इस रैली के पीछे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति भी साफ नजर आई। पार्टी वेस्ट यूपी में जाट और गुर्जर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद गठबंधन ने 43 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 93 सीटें मिली थीं। अब सपा इस समीकरण को बदलना चाहती है। रैली में बड़ी संख्या में जाट, गुर्जर और अन्य समुदाय के लोग शामिल हुए, जिससे संकेत मिला कि पार्टी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
मिहिर भोज की प्रतिमा का बड़ा दांव
अखिलेश यादव ने दादरी से एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि लखनऊ में राजा मिहिर भोज की प्रतिमा लगाई जाएगी। मिहिर भोज को गुर्जर समाज अपना नायक मानता है। ऐसे में यह कदम सीधे तौर पर गुर्जर वोट बैंक को साधने की कोशिश माना जा रहा है। सपा की नॉन-यादव OBC रणनीति में गुर्जर समुदाय की अहम भूमिका है, इसलिए यह ऐलान एक बड़ा राजनीतिक संकेत है।
बीजेपी पर हमलावर रहे अखिलेश
रैली के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने यूपी में एयरपोर्ट और विकास मॉडल को ‘हवा-हवाई’ बताते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन एयरपोर्ट्स का उद्घाटन हुआ, उनमें से कई बंद पड़े हैं। इसके अलावा उन्होंने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मामले का जिक्र करते हुए भी सरकार को घेरा। अखिलेश ने दावा किया कि मेट्रो और कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उनकी सरकार की देन हैं।
हिंदू-मुस्लिम समीकरण साधने की कोशिश
2013 के दंगों के बाद वेस्ट यूपी में हिंदू और मुस्लिम वोटर अलग-अलग हो गए थे। सपा इस खाई को पाटने की कोशिश कर रही है। 2019 में चौधरी अजीत सिंह और 2022 में Jayant Chaudhary ने इस दूरी को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि 2024 में रालोद का बीजेपी के साथ जाना सपा के लिए झटका था। फिर भी, सपा ने मुजफ्फरनगर और कैराना जैसी सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे पार्टी को उम्मीद मिली है।
एक्सपर्ट की राय: रैली कितनी सफल?
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि दादरी रैली कई मायनों में सफल रही। इतनी बड़ी भीड़ जुटाना, खासकर तब जब पार्टी सत्ता में न हो, अपने आप में बड़ी बात है।इससे यह संकेत मिलता है कि सपा का ‘पीडीए फॉर्मूला’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) असर दिखा रहा है। हालांकि बीजेपी का कहना है कि सपा उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटा सकी और वह सिर्फ जातिगत राजनीति कर रही है।
आगे की रणनीति क्या है?
2027 के विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में सपा ने साफ कर दिया है कि उसका फोकस युवा, महिला और किसान रहेंगे। आने वाले समय में अखिलेश यादव अलग-अलग रैलियों के जरिए अपना रोडमैप जनता के सामने रखेंगे।
दादरी की रैली सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह 2027 के चुनाव का ट्रेलर भी थी। अखिलेश यादव ने इस मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी पार्टी सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस मुद्दों पर राजनीति करती है। किसान, महिला और युवा—इन तीन वर्गों को केंद्र में रखकर सपा अपनी रणनीति तैयार कर रही है। अब देखना होगा कि यह रणनीति वेस्ट यूपी में कितना असर डालती है और क्या सपा बीजेपी के मजबूत गढ़ में सेंध लगा पाती है या नहीं।
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