ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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लखनऊ में महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बड़ी जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा का उद्देश्य आधी आबादी के अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाना और विपक्ष के रुख के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। यह मार्च मुख्यमंत्री आवास, कालीदास मार्ग से शुरू होकर विधान भवन तक गया। इस पदयात्रा में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हजारों महिलाएं शामिल हुईं, जिससे यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।
बड़े नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी अहमियत
इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री के साथ-साथ दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी शामिल रहे। इसके अलावा यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी, महिला आयोग की अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम भी इस मार्च का हिस्सा बनी। बीजेपी महिला मोर्चा की सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ लखनऊ के लगभग सभी वार्डों से महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर हमला
यह पदयात्रा संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पारित न होने के बाद निकाली गई। बीजेपी ने पहले ही ऐलान किया था कि वह पूरे देश में विपक्ष के खिलाफ अभियान चलाएगी। उसी रणनीति के तहत लखनऊ में यह मार्च आयोजित किया गया।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों—कांग्रेस, सपा और अन्य गठबंधन दलों—पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का आचरण महिलाओं की गरिमा के खिलाफ रहा है।
सीएम योगी का संबोधन और संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह पदयात्रा देशभर में चल रहे आक्रोश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ जो रवैया अपनाया गया, वह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश का हर नागरिक और खासकर महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खड़ी हैं और यह आंदोलन उसी का प्रतीक है।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी, शक्ति प्रदर्शन
इस पदयात्रा की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की भारी भागीदारी रही। हजारों की संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतरीं और उन्होंने महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। बीजेपी का कहना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
लखनऊ की यह जन आक्रोश महिला पदयात्रा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला अधिकारों के समर्थन में एक बड़ा संदेश भी है। यह साफ संकेत देता है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब सड़कों तक पहुंच चुका है और आने वाले समय में यह राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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