ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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इस बार प्रयागराज के माघ मेले में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाएगी। मेला प्राधिकरण की ओर से आयोजकों को पहले ही नोटिस दे दिया गया है। बताया गया कि मेला परिसर में मूर्ति का लोकार्पण नहीं किया जा सकता और अन्य गतिविधियों पर भी रोक है। इस पर यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने प्रतिक्रिया दी और इसे गलत बताया।
प्रशासन ने लगाए सख्त नियम
मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान द्वारा माघ मेले में शिविर लगाया जा रहा था, जिसमें मूर्ति का लोकार्पण होना था। माता प्रसाद पांडे ने बताया कि प्रशासन ने नोटिस जारी कर कहा कि आयोजक मूर्ति नहीं लगा सकते, दूध बांट नहीं सकते और गाय भी नहीं रख सकते। यही शर्तों पर आयोजकों को जगह दी गई है।
नेता प्रतिपक्ष का जवाब
माता प्रसाद पांडे ने कहा कि प्रशासन को हमारी ओर से जवाब दे दिया गया है। वे कल वहां जाएंगे और अधिकारियों से इस मामले पर बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि अन्य आयोजकों के कैंप में तो सरकार के बड़े-बड़े नेताओं के कटआउट लगे रहते हैं। कटआउट और मूर्ति में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल के कुंभ मेले में किसी तरह का विरोध नहीं हुआ था।
मूर्ति पर रोक को बताया अनुचित
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि माघ मेले में हर कोई कैंप लगाता है। साधु-संत भी अपने कैंप में कटआउट लगाते हैं। ऐसे में मूर्ति लगाना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह विरोध समझ नहीं आ रहा। पिछले साल कोई समस्या नहीं थी, अब अचानक विरोध क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है।
धार्मिक और सामाजिक गतिविधि, न कि राजनीतिक
माता प्रसाद पांडे ने जोर देकर कहा कि मूर्ति लगाना, नाश्ता-पानी और दूध पिलाना कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है। यह सामाजिक और धार्मिक गतिविधि है। उन्होंने कहा कि जो लोग नेताजी को मानते हैं, वे साधु-संतों के पास भी जाएंगे और फिर नेताजी की मूर्ति पर प्रणाम करेंगे। यह उनका मौलिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता है।
आगे की रणनीति
शिविर के आयोजक संदीप यादव ने कहा कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई अंतिम उत्तर नहीं मिला है। वे प्रयागराज जाकर अधिकारियों से बात करेंगे। यदि अनुमति नहीं मिली तो राष्ट्रीय अध्यक्ष से परामर्श करके आगे की रणनीति तय की जाएगी।
माघ मेले में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति पर रोक विवाद का विषय बन गई है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह धार्मिक और सामाजिक गतिविधि है, जबकि प्रशासन ने सख्त नियम लगाए हैं। मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बन गया है, और आयोजकों ने कानूनी और प्रशासनिक समाधान खोजने का संकल्प लिया है।
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